न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल में ‘बूंग’ का जलवा, तीन बड़े पुरस्कार जीतकर रचा इतिहास
फरहान अख्तर की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाते हुए न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल 2026 में शानदार सफलता हासिल की है। फिल्म ने तीन प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतकर समारोह में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई और सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी।
तीन बड़े पुरस्कारों पर ‘बूंग’ का कब्जा
28 से 31 मई तक आयोजित इस प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव के समापन समारोह में ‘बूंग’ को सर्वश्रेष्ठ डेब्यू फिल्म (Best Debut Film) का पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं फिल्म की निर्देशक लक्ष्मीप्रिया देवी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक (Best Director) के सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा फिल्म के युवा कलाकार गुगुन किपगेन ने सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार (Best Child Actor) का पुरस्कार अपने नाम किया।
15 भाषाओं की फिल्मों के बीच बनाई खास पहचान
न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल में इस वर्ष भारत की 15 विभिन्न भाषाओं की फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। कड़े मुकाबले के बावजूद ‘बूंग’ ने अपनी भावनात्मक कहानी, दमदार निर्देशन और प्रभावशाली अभिनय के दम पर निर्णायकों का दिल जीत लिया।
क्या है फिल्म की कहानी?
‘बूंग’ एक संवेदनशील और भावनात्मक कहानी है, जो मणिपुर की घाटी में रहने वाले एक मासूम लड़के के जीवन पर आधारित है। अपनी मां के अकेलेपन और परिवार की कठिन परिस्थितियों को देखकर वह अपने पिता को वापस घर लाने का फैसला करता है। इस यात्रा के दौरान उसे कई चुनौतियों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। फिल्म पारिवारिक रिश्तों, संघर्ष और उम्मीद की एक प्रेरणादायक कहानी प्रस्तुत करती है।
पहले भी जीत चुकी है अंतरराष्ट्रीय सम्मान
यह पहली बार नहीं है जब ‘बूंग’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया हो। इससे पहले फिल्म BAFTA 2026 में बेस्ट चिल्ड्रन एंड फैमिली फिल्म का प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुकी है। लगातार मिल रही वैश्विक पहचान ने मणिपुरी सिनेमा को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
भारतीय सिनेमा के लिए बड़ी उपलब्धि
फिल्म समीक्षकों का मानना है कि ‘बूंग’ की सफलता भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। फिल्म ने न केवल मणिपुर की संस्कृति और संवेदनाओं को दुनिया तक पहुंचाया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि अच्छी कहानी और प्रभावशाली प्रस्तुति भाषा की सीमाओं से परे जाकर दर्शकों के दिलों तक पहुंच सकती है।






