भाजपा, संकल्प और राष्ट्रवाद: राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से नीतिगत बदलाव तक

भारतीय राजनीति में Bharatiya Janata Party (भाजपा) का उदय केवल एक राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि नीतिगत और वैचारिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। लेखक Mrityunjay Dixit के अनुसार, वर्ष 2014 में Narendra Modi के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद पार्टी अपने प्रमुख संकल्पों को पूरा करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ी है।
🏛️ प्रमुख संकल्प और उनके क्रियान्वयन
भाजपा द्वारा किए गए प्रमुख निर्णयों में शामिल हैं:
- Ram Mandir Ayodhya का निर्माण
- Article 370 का हटाया जाना
- महिलाओं के लिए 33% आरक्षण विधेयक का कानून बनना
इन कदमों को पार्टी के राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से जोड़ा जाता है।
⚖️ समान नागरिक संहिता पर जोर
Uniform Civil Code भाजपा के प्रमुख एजेंडा में शामिल रहा है।
- Uttarakhand में इसे लागू किया गया
- Gujarat में भी कानून पारित किया गया
इसका उद्देश्य:
- विवाह, तलाक और संपत्ति जैसे मामलों में समान कानून लागू करना
- कानूनी भेदभाव को समाप्त करना
🗳️ राजनीतिक बहस और विरोध
इस कानून को लेकर राजनीतिक मतभेद भी सामने आए:
- विपक्ष, विशेष रूप से Indian National Congress ने इसे चुनावी मुद्दा बताया
- इसे कुछ वर्गों द्वारा धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील माना गया
वहीं सरकार का कहना है कि यह कानून समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित करने के लिए है।
👩⚖️ महिला सशक्तिकरण का पहलू
समान नागरिक संहिता के पक्ष में तर्क:
- महिलाओं को समान अधिकार
- विवाह और संपत्ति में न्याय
- लिव-इन संबंधों को कानूनी पहचान
❓ उठते सवाल
इस कानून को लेकर कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठे:
- आदिवासी समुदाय को इससे बाहर क्यों रखा गया?
- क्या यह वास्तव में सभी के लिए समान है?
🌐 राष्ट्रवाद और नीति का संबंध
लेख के अनुसार, भाजपा की नीतियों में राष्ट्रवाद का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है, जहां:
- सांस्कृतिक पहचान
- संवैधानिक सुधार
- सामाजिक बदलाव
तीनों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया जा रहा है।






