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भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार की सुनवाई टली: 62 हजार 500 दुकानों का होने वाला था फैसला; 190 बंद हुई

भोपाल। रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार और व्यावसायिक उपयोग मामले में सुप्रीम कोर्ट में तय सुनवाई टल गई है। जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण अब सुनवाई बाद में होगी। हालांकि अभी तारीख तय नहीं है।

नगर निगम अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर चुका है, जबकि रहवासी निगम की कार्रवाई को गलत बताते हुए अपने दस्तावेज पेश करेंगे। निगम की नोटिस और सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़कों पर उतर आए थे।

5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस देना शुरू किया था। 15 दिन तक नोटिस की कार्रवाई चली। तीन दिन तक 190 प्रतिष्ठानों को बंद किया गया।

रहवासियों ने कार्रवाई को बताया झूठा
दूसरी ओर, रहवासियों ने निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि निगम ने कोर्ट में झूठी कार्रवाई दिखाई है। जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, वे दोबारा खुल गए।
10 सदस्यीय जांच समिति पर भी रोक
भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत के आदेश भी निरस्त कर दिए थे।

किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में नगर निगम की कार्रवाई और पेश की गई रिपोर्ट पर आगे की स्थिति साफ हो सकती है।

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