पिता की याद और परिवार की जिम्मेदारी के साथ हॉकी में वापसी: ब्यूटी डुंगडुंग की संघर्षपूर्ण कहानी

महज 22 वर्ष की उम्र में ब्यूटी डुंगडुंग, भारतीय महिला हॉकी टीम की फॉरवर्ड, अपने कंधों पर परिवार और खेल की बड़ी जिम्मेदारी उठाए हुए हैं। वर्तमान में वह बेंगलुरु में राष्ट्रीय शिविर में तैयारी कर रही हैं, लेकिन मैदान पर उनकी वापसी उनके जीवन की सबसे कठिन लड़ाई रही है।

साल 2023 में गंभीर घुटने की चोट के कारण उन्हें लगभग दो वर्षों तक पुनर्वास करना पड़ा। इस दौरान उन्हें न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक चुनौती का सामना भी करना पड़ा, क्योंकि चोट के समय ही उनके पिता का निधन हो गया। ब्यूटी ने कहा, “चोट के समय ही मेरे पिता का देहांत हो गया। कई बार लगा कि शायद अब वापसी नहीं हो पाएगी।”

झारखंड के छोटे से गांव में पली-बढ़ीं ब्यूटी के पिता ही उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत थे। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बांस से उनकी पहली हॉकी स्टिक बनाई और बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए दिहाड़ी मजदूरी भी की।

आज ब्यूटी अपने परिवार की मुख्य आधार हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरी के माध्यम से वह पूरे परिवार का खर्च उठाती हैं, अपनी मां की देखभाल करती हैं, और भतीजों की पढ़ाई का खर्च भी वहन करती हैं।

उन्होंने कहा, “अगर ज्यादा सोचूंगी तो खुद ही परेशान हो जाऊंगी। इसलिए पूरा ध्यान खेल पर लगाती हूं। अच्छा लगता है कि मैं अपने परिवार की आर्थिक मदद कर पा रही हूं।”

भावनात्मक बोझ बढ़ने पर ब्यूटी अपनी टीम के साथियों का सहारा भी लेती हैं। लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने फिर से खेल में लय हासिल करनी शुरू कर दी है। वह एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी और हॉकी इंडिया लीग में खेल चुकी हैं और अब हैदराबाद में 2026 एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप क्वालीफायर की तैयारियों में जुटी हैं।

हर बार जब ब्यूटी हॉकी स्टिक थामती हैं, तो उसमें उनकी मां की देखभाल, परिवार का भविष्य और पिता की याद जुड़ी होती है, जिन्होंने बांस से उनकी पहली स्टिक बनाकर उनके सपनों को आकार दिया था।

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