संयोग से शुरुआत, इतिहास तक का सफर: अंजलि मुंडा ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में जीता स्वर्ण

कभी एक साधारण चयन से शुरू हुआ सफर आज इतिहास बन गया। ओडिशा की किशोरी अंजलि मुंडा ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देशभर में अपनी पहचान बना ली है।
जाजपुर जिले के एक छोटे से गांव गहिरागड़िया की रहने वाली अंजलि ने साल 2022 में महज 11 वर्ष की उम्र में तैराकी को चुना था। शुरुआत में यह सिर्फ एक खेल था, लेकिन उनकी मेहनत और लगन ने इसे करियर में बदल दिया।
अंजलि ने 200 मीटर फ्रीस्टाइल में 2:39.02 सेकंड का समय निकालते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ वह इस प्रतियोगिता की पहली महिला स्वर्ण पदक विजेता भी बनीं। उन्होंने कर्नाटक की मजबूत टीम को सभी स्वर्ण जीतने से भी रोक दिया।
अंजलि की सफलता के पीछे कड़ी मेहनत के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का भी अहम योगदान रहा है। उन्होंने खेलो इंडिया अस्मिता लीग में हिस्सा लेकर अपने खेल को निखारा, जहां उन्होंने 2024 में दो रजत पदक जीते थे।
हाल ही में गुवाहाटी में आयोजित स्विमिंग लीग में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था और उसी लय को रायपुर में बरकरार रखा।
अंजलि ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच और परिवार को देते हुए कहा कि पहला पदक जीतने के बाद उन्हें विश्वास हुआ कि वह इस खेल में आगे बढ़ सकती हैं।
हालांकि इस बड़ी उपलब्धि के बावजूद अंजलि संतुष्ट नहीं हैं। उनका लक्ष्य अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय (पर्सनल बेस्ट) को और बेहतर करना है। अब वह 50 मीटर बैकस्ट्रोक, 100 मीटर बैकस्ट्रोक और 200 मीटर इंडिविजुअल मेडली स्पर्धाओं में भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं।
यह Anjali Munda gold medal कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही अवसर, मेहनत और विश्वास के साथ कोई भी खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर इतिहास रच सकता है।






