अक्षरधाम मंदिर में 108 फीट ऊंची नीलकंठ वर्णी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न

अक्षरधाम मंदिर में 108 फीट ऊंची नीलकंठ वर्णी की भव्य पंचधातु प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा गुरुवार को वैदिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुई। यह आयोजन बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के प्रमुख महंतस्वामी महाराज के सान्निध्य में किया गया।
सुबह 6 बजे से शुरू हुए इस समारोह में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इससे पहले 25 मार्च से ही विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई थी। बुधवार को आयोजित विश्व शांति महायज्ञ में भी बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया और शांति के प्रतीक सफेद कबूतरों को उड़ाकर विश्व कल्याण की कामना की गई।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद महंतस्वामी महाराज ने कहा कि यह प्रतिमा विश्व में शांति और सद्गुणों का संदेश देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक प्रेरणा और कल्याण की अनुभूति होगी।
यह 108 फीट ऊंची प्रतिमा नीलकंठ वर्णी के तपस्वी स्वरूप को दर्शाती है, जिसमें उन्हें एक पैर पर ध्यानमग्न मुद्रा में दिखाया गया है। इसे लगभग एक वर्ष में तैयार किया गया है और इसके निर्माण में करीब 50 कारीगरों ने योगदान दिया है।
नीलकंठ वर्णी, भगवान स्वामीनारायण का बाल तपस्वी स्वरूप है। उन्होंने मात्र 11 वर्ष की आयु में घर छोड़कर भारतभर में लगभग 12,000 किलोमीटर की आध्यात्मिक यात्रा की थी और अनेक प्रमुख तीर्थों का भ्रमण किया था।
यह Neelkanth Varni statue 108 feet न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति, तप और आध्यात्मिक साधना का भी अद्भुत उदाहरण बनकर उभरी है।






