|

अहिल्याबाई जयंती पर महेश्वर में होगा शिव का समरसता अभिषेक, हर घर से अर्पित होंगे 108 अक्षत

खरगोन। ऐतिहासिक नगरी Maheshwar में आज देवी Ahilyabai Holkar की 301वीं जन्म जयंती श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर भगवान शिव का भव्य सामूहिक समरसता अभिषेक आयोजित किया जाएगा, जिसमें नगर के विभिन्न समाजों और मोहल्लों के लोग बड़ी संख्या में भाग लेंगे।

हर घर से अर्पित होंगे 108 अक्षत

आयोजन की सबसे विशेष बात यह है कि महेश्वर के प्रत्येक घर से श्रद्धालु भगवान शिव को 108 अक्षत (चावल के दाने) अर्पित करेंगे। इस अनूठी पहल का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।

श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ इस आयोजन में भाग ले रहे हैं और नगर में धार्मिक माहौल बना हुआ है।

अहिल्याबाई की प्रतिमा का होगा विशेष पूजन

देवी अहिल्याबाई होल्कर की जन्म त्रिशताब्दी पूर्ण होने के उपलक्ष्य में नगर परिषद द्वारा भवानी माता चौक स्थित उनकी प्रतिमा का विशेष पूजन और पुण्यार्चन किया जाएगा।

नगर परिषद ने इस आयोजन को सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए विशेष तैयारियां की हैं। शहर के विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों को भी कार्यक्रम से जोड़ा गया है।

नगर गौरव दिवस के रूप में मनाई जा रही जयंती

महेश्वर देवी अहिल्याबाई होल्कर की राजधानी रहा है और उनके शासनकाल की ऐतिहासिक विरासत आज भी यहां जीवंत दिखाई देती है। इसी कारण उनकी जयंती को नगर परिषद द्वारा नगर गौरव दिवस के रूप में भी मनाया जा रहा है।

अहिल्याबाई होल्कर को न्यायप्रिय शासक, धर्मपरायण समाजसेवी और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की संरक्षक के रूप में याद किया जाता है।

40 समाजों और 11 मोहल्लों की भागीदारी

नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि Gajraj Yadav के अनुसार, समरसता अभिषेक कार्यक्रम में नगर के 40 समाजों और 11 मोहल्लों के कुल 255 जोड़े शामिल होंगे।

प्रत्येक समाज से पांच-पांच जोड़ों का चयन किया गया है, जो विभिन्न पूजन सामग्रियों और द्रव्यों से भगवान शिव का अभिषेक करेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य समाज में आपसी भाईचारे, एकता और समरसता का संदेश देना है।

धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव

अहिल्याबाई जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम महेश्वर की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को नई ऊर्जा देने का प्रयास है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अहिल्याबाई होल्कर के आदर्शों और उनके योगदान से परिचित कराते हैं।

महेश्वर में आज का यह आयोजन श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक समरसता का एक अनूठा उदाहरण बनने जा रहा है।

Share

Similar Posts