देश मना रहा है गुरु तेगबहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस, राष्ट्रपति मुर्मु ने दी श्रद्धांजलि

देश आज नौवें सिख गुरु, गुरु तेगबहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस मना रहा है। वर्ष 1675 में मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर गुरु तेगबहादुर जी को शहीद किया गया था। अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उनका यह सर्वोच्च बलिदान भारत के इतिहास में अमर है।
गुरु तेगबहादुर जी ने अपने जीवनकाल में गुरु नानक देव जी के संदेशों का पूरे देश में व्यापक प्रसार किया। उन्होंने 116 शबद और 15 रागों की रचना की, जो आज भी सिख पंथ की मूल आध्यात्मिक धरोहर माने जाते हैं। उनके उपदेश और वाणी आदि ग्रंथ में संकलित हैं, जो मानवता, निस्वार्थता और सत्य के मार्ग को दर्शाते हैं।
हिंदू, सिख और विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए गुरु तेगबहादुर जी का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्हें “हिंद दी चादर” के नाम से सम्मानित किया जाता है, क्योंकि उन्होंने कश्मीरी पंडितों समेत सभी के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उनका त्याग आज भी देश को एकता, साहस और करुणा का मार्ग दिखाता है।
350वें शहीदी दिवस के अवसर पर देशभर में गुरुद्वारों और धार्मिक स्थलों पर कीर्तन, अरदास और श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित की जा रही हैं। लोग गुरु तेगबहादुर जी के बलिदान को याद करते हुए सेवा, करुणा और मानवीय मूल्यों के पालन का संकल्प ले रहे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी गुरु तेगबहादुर जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए उनका बलिदान देश को एकता के सूत्र में पिरोता है। राष्ट्रपति ने उनके संदेशों को सत्य और न्याय का मार्ग अपनाने की प्रेरणा बताया।






