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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर भारतीय दूतावास की संगोष्ठी, “आज के विश्व में भगवद्गीता की प्रासंगिकता” पर गहन विमर्श

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के उपलक्ष्य में भारतीय दूतावास ने “आज के विश्व में भगवद्गीता की प्रासंगिकता” विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय और त्रिभुवन विश्वविद्यालय के विद्वानों ने भाग लिया और गीता के दार्शनिक, आध्यात्मिक तथा व्यावहारिक आयामों पर गहन प्रस्तुतियाँ दीं। वक्ताओं ने कहा कि गीता का शाश्वत ज्ञान आधुनिक समय की चुनौतियों—मानसिक तनाव, निर्णय क्षमता, नेतृत्व और जीवन प्रबंधन—में आज भी उतना ही सार्थक है।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. नारायण प्रसाद गौतम ने संजय को दिव्य दृष्टि दिए जाने की घटना को याद किया, जब ऋषि वेदव्यास ने उन्हें कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में हो रही महाभारत की घटनाओं को देखने की क्षमता प्रदान की थी। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग ज्ञान, सत्य और कर्तव्य के प्रति जागरूकता का दिव्य संदेश देता है।

नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के वाल्मीकि परिसर के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रेम राज नेउपाने ने गीता के कर्मयोग सिद्धांत पर विस्तृत चर्चा की और बताया कि निष्काम कर्म की अवधारणा आज भी व्यक्तिगत और सामाजिक संतुलन के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।

कार्यक्रम के दौरान नेपाल में एसवीसीसी के छात्रों और शिक्षकों ने गीता से प्रेरित सांस्कृतिक नृत्य और संगीत प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव एक सप्ताह तक चलने वाला उत्सव है जो इस वर्ष 1 दिसंबर, गीता जयंती से प्रारंभ होगा। इसका मुख्य आयोजन हरियाणा के कुरुक्षेत्र में होगा, जहाँ माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था।

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