सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों और राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने के दिए सख्त निर्देश

नई दिल्ली, 7 नवम्बर 2025 — सर्वोच्च न्यायालय ने देशभर में आवारा पशुओं और कुत्तों से जुड़ी बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए आज कई सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों और राजमार्गों को आवारा मवेशियों से मुक्त रखा जाए और लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए। अदालत ने निर्देश दिया कि हर शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन को आवारा कुत्तों के प्रवेश से रोकने के लिए उपयुक्त तरीके से बाड़बंदी (fencing) की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 (Animal Birth Control Rules 2023) का सख्ती से पालन कराने का आदेश देते हुए कहा कि स्थानीय नगर निकाय नियमित रूप से आवारा पशुओं को पकड़ें, उनका टीकाकरण और नसबंदी कराकर निर्धारित आश्रय स्थलों (shelters) में रखें।
शीर्ष अदालत ने कहा कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराना होगा, अन्यथा वे व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा कि आठ सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिसमें इन निर्देशों के कार्यान्वयन की स्थिति बताई जाए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अब तक कई राज्यों ने पशु जन्म नियंत्रण नियमों में ढिलाई बरती है, जो चिंता का विषय है।
इस फैसले से यह स्पष्ट संकेत गया है कि न्यायालय अब आवारा पशुओं से जुड़ी समस्याओं पर सख्त रुख अपनाएगा और सार्वजनिक स्थलों को सुरक्षित रखने के लिए कठोर कदमों की निगरानी करेगा।






