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पत्रकार के वेश में ‘लुटेरा’ है अंकुर — कलम की आड़ में ब्लैकमेलिंग का साम्राज्य, समाजसेवियों और कारोबारियों से उगाही का जाल

इंदौर, 25 अक्टूबर 2025 | प्रदेश प्रकाश विशेष रिपोर्ट
पत्रकारिता, जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, अब कुछ लोगों के लिए धंधा और डराने का औजार बनती जा रही है।
ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है — जहाँ ‘अंकुर’ नामक तथाकथित पत्रकार ने अपने प्रेस कार्ड और क़लम की आड़ में ब्लैकमेलिंग का पूरा साम्राज्य खड़ा कर लिया।

🕵️‍♂️ ईमानदारी का पहला सूटकेस, ब्लैकमेलिंग का नया हथियार!

सूत्रों के अनुसार, अंकुर खुद को पत्रकार बताकर प्रतिष्ठित उद्योगपतियों, बिल्डर्स, डॉक्टरों और समाजसेवियों से संपर्क करता था।
पहले वह अपने “समाचार पोर्टल” या “यूट्यूब चैनल” पर किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ आरोपित सामग्री तैयार करता, फिर उसे वायरल करने की धमकी देकर मोटे पैसों की माँग करता था।

जानकारी के मुताबिक, कई लोगों ने उससे तंग आकर पुलिस और प्रशासन को शिकायतें भेजीं।
इसी के बाद मामला खुलकर सामने आया और प्रदेश प्रकाश की जांच टीम ने जब पड़ताल शुरू की, तो चौंकाने वाले दस्तावेज़ हाथ लगे।

📜 अपराधिक रिकॉर्ड भी हुआ उजागर

प्रदेश प्रकाश को प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार, अंकुर के खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं —
धोखाधड़ी, जबरन वसूली और धमकी जैसे अपराधों से उसका पुराना नाता रहा है।
सूत्र बताते हैं कि वह खुद को “सामाजिक कार्यकर्ता” बताकर सरकारी कार्यालयों तक पहुँच बनाता था और फिर वहां से मिली जानकारी का ग़लत इस्तेमाल कर उगाही करता था।

⚖️ न्यायालय की सख्त टिप्पणी

इंदौर न्यायालय में इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा —

“पत्रकारिता समाज का दर्पण है, लेकिन जब वही दर्पण गंदा हो जाए, तो सच भी धुंधला दिखने लगता है।”
न्यायालय ने इस मामले में विस्तृत जांच और पत्रकारिता के नाम पर चल रहे फर्जी नेटवर्क की पहचान करने के निर्देश दिए हैं।

💬 प्रदेश प्रकाश का रुख साफ़ — सच्चाई सामने लाना ही धर्म

प्रदेश प्रकाश इस खबर को प्रकाशित कर समाज को यह संदेश देना चाहता है कि
“पत्रकारिता की आड़ में अपराध बर्दाश्त नहीं होगा।”
हमारी टीम ने इस खबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य प्रशासन के संज्ञान में भी भेजा है, ताकि दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो सके।

🧩 क़लम का अपमान, समाज की ठगी

अंकुर जैसे फर्जी पत्रकारों के कारण वास्तविक पत्रकारिता की साख पर बट्टा लग रहा है।
जहां एक ओर सच्चे पत्रकार रात-दिन मेहनत करके सच सामने लाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर ये “क़लम के सौदागर” पत्रकारिता की गरिमा को लूटने पर तुले हैं।

पत्रकारिता कोई पेशा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है।
यदि कोई व्यक्ति इस जिम्मेदारी को निजी लाभ या धमकी का साधन बना ले — तो समाज का विश्वास ही टूट जाता है।
प्रदेश प्रकाश ऐसे हर चेहरे को उजागर करता रहेगा जो ईमानदारी की आड़ में अपराध छिपा रहे हैं।

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