BRICS में आतंकवाद पर सख्त रुख: पहलगाम हमले की निंदा; टैरर फंडिंग और आतंकियों के पनाहगारों पर कार्रवाई

नई दिल्ली। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें BRICS समिट की औपचारिक शुरुआत की। BRICS देशों ने नई दिल्ली घोषणा-2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दी। इसमें 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई है। घोषणा में आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए आतंकियों की फंडिंग और उन्हें पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की बात कही गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि BRICS किसी के खिलाफ नहीं है। यह ऐसा मंच है, जो सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश करता है। समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत BRICS देशों के नेता शामिल हुए। जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। PM मोदी ने उनका हाथ पकड़कर उन्हे मंच की सजावट दिखाई।
नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद पर 5 बड़ी बातें
1. पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा
BRICS देशों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले में 26 लोगों की मौत का जिक्र नई दिल्ली घोषणा में किया गया है।
2. आतंकवाद के हर रूप की निंदा
घोषणा में आतंकवाद के हर रूप और हर वजह की निंदा की गई है। BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए इसके खिलाफ मिलकर कार्रवाई पर जोर दिया।
3. आतंकवाद को धर्म से न जोड़ने की बात
BRICS देशों ने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। आतंकवाद को किसी भी वजह से सही नहीं ठहराया जा सकता।
4. आतंकियों की फंडिंग और पनाह देने वालों पर कार्रवाई
घोषणा में आतंकवाद की फंडिंग, सीमा पार आतंकवाद और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने देने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया। आतंकियों और आतंकी संगठनों की जवाबदेही तय करने की बात भी कही गई है।
5. UN की आतंकरोधी संधि जल्द अपनाने की मांग
BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर प्रस्तावित संयुक्त राष्ट्र की आतंकरोधी संधि को जल्द अपनाने की मांग की है। साथ ही BRICS के मूल सिद्धांतों में आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता और सहमति से फैसले लेने पर जोर दिया गया।
सुबह 4 बजे तक चली बातचीत, फिर संयुक्त बयान पर सहमति
BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान को लेकर बातचीत काफी देर तक चली। यह बातचीत सुबह करीब 4 बजे तक चली। कई अहम और विवादित मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद थे।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान, सऊदी अरब और UAE के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं। इसके बावजूद भारत ने बातचीत के जरिए मतभेदों को दूर करने और सभी देशों को एक राय पर लाने की कोशिश की। इसके बाद संयुक्त बयान पर सहमति बनी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट के पहले दिन बैठक के अंत में नई दिल्ली घोषणा को मंजूरी दिए जाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी सदस्य देश ने इस घोषणा पर आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद नई दिल्ली घोषणा-2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।
एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक पाबंदियों पर चिंता
नई दिल्ली घोषणा में एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक पाबंदियों पर भी चिंता जताई गई। BRICS देशों ने कहा कि ऐसे कदम WTO के नियमों के अनुरूप होने चाहिए। इसके अलावा परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे और बढ़ते वैश्विक तनाव पर भी चिंता जताई गई।
भारत की BRICS अध्यक्षता में 30 शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान हुए काम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता का फोकस आम लोगों और मानवता को सबसे आगे रखने पर रहा।
भारत ने लचीलापन, इनोवेशन, सहयोग और टिकाऊ विकास को प्राथमिकता दी। इस दौरान BRICS देशों की टीमों का करीब 30 शहरों में स्वागत किया गया और 350 से ज्यादा बैठकें आयोजित हुईं।
7 साल बाद भारत आए शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। शनिवार को वे BRICS समिट के आयोजन स्थल भारत मंडपम पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। समिट के दौरान मोदी, जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक साथ मंच पर नजर आए। मोदी ने दोनों नेताओं का हाथ थामे हुए भी तस्वीर खिंचवाई।
भारत मंडपम में स्वागत के दौरान मंच पर रामेश्वरम के प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर की तस्वीर भी लगी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग को मंदिर के बारे में जानकारी दी।
जिनपिंग बोले- पश्चिम एशिया के युद्ध से लोगों को भारी नुकसान
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर चिंता जताई। सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, उन्होंने कहा कि इस युद्ध से पूरे क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक, इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का हित भी पूरा नहीं हो रहा है।
अगले साल चीन संभालेगा BRICS की अध्यक्षता
अगले साल BRICS की अध्यक्षता चीन करेगा। शी जिनपिंग ने मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी के हित में नहीं है। जिनपिंग ने BRICS देशों से इतिहास के सही पक्ष के साथ मजबूती से खड़े होने की बात कही।
ईरानी राष्ट्रपति बोले- परमाणु ठिकानों पर हमले बंद हों
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों को किसी भी हमले या धमकी से सुरक्षित रखा जाना चाहिए। उन्होंने BRICS देशों से एकतरफा प्रतिबंधों का मिलकर सामना करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। पजशकियान ने कहा कि BRICS को दुनिया में न्याय की आवाज बनना चाहिए। उन्होंने फिलिस्तीन के मुद्दे को भी अहम बताया। उनके मुताबिक, फिलिस्तीनी लोगों को अपने भविष्य का फैसला खुद करने का अधिकार मिलना चाहिए।
मोदी ने BRICS के 20 साल पर 2 डाक टिकट जारी किए
BRICS के 20 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो डाक टिकट भी जारी किए।
BRICS की बंद कमरे में बैठक भी हुई
समिट के दौरान BRICS देशों के नेताओं की बंद कमरे में बैठक हुई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत सदस्य देशों के नेता शामिल हुए। बैठक में BRICS देशों के बीच सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।
ईरान, इंडोनेशिया और अबू धाबी के नेता भी पहुंचे
BRICS समिट में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान भी भारत मंडपम पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी ने उनका स्वागत किया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई नेता भी समिट में शामिल हुए।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की बेटी जहरा पजशकियान BRICS मार्केट पहुंचीं। उन्होंने यहां बने ईरान पवेलियन का दौरा किया और ईरानी कला व हस्तशिल्प देखे।
जयशंकर ने बेलारूस के विदेश मंत्री से मुलाकात की
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने BRICS समिट के दौरान बेलारूस के विदेश मंत्री मैक्सिम रिज़ेंकोव से मुलाकात की। दोनों नेताओं की मुलाकात दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई।
BRICS नई दिल्ली घोषणा की 10 अहम बातें
- पहलगाम आतंकी हमले की निंदा – 22 अप्रैल 2025 के हमले की कड़ी निंदा।
- आतंकवाद के हर रूप का विरोध – आतंकवाद को किसी भी वजह से सही नहीं ठहराया गया।
- धर्म से आतंकवाद को जोड़ने का विरोध – किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय को आतंकवाद से जोड़ने से इनकार।
- सीमा पार आतंकवाद पर कार्रवाई – आतंकवाद और उसकी फंडिंग के खिलाफ मिलकर कार्रवाई।
- आतंकियों को पनाह देने वालों पर कार्रवाई – आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने देने वालों की जवाबदेही तय करने पर जोर।
- UN आतंकरोधी संधि – प्रस्तावित संधि को जल्द अपनाने की मांग।
- BRICS के मूल सिद्धांत – संप्रभु समानता, आपसी सम्मान, एकजुटता और सहमति से फैसलों पर जोर।
- एकतरफा टैरिफ पर चिंता – व्यापारिक कदम WTO नियमों के अनुरूप होने की बात।
- परमाणु खतरे पर चिंता – परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे को लेकर चिंता।
- भारत की अध्यक्षता की सराहना – BRICS प्लस और आउटरीच कार्यक्रमों के लिए भारत की अध्यक्षता की तारीफ।