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‘बघेल गो बैक’ के नारों के बीच बड़ा फैसला: पंजाब कांग्रेस की कमान अब सचिन पायलट के हाथ, जानिए आलाकमान के इस फैसले के 3 मायने

राहुल गांधी के पंजाब दौरे से ठीक पहले कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब के प्रभारी पद से हटाकर राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को राज्य की कमान सौंपी है। वहीं बघेल को अब असम का प्रभार दिया गया है। पंजाब में बीते लंबे समय से जारी अंतर्कलह और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी गुट के उग्र विरोध के आगे आखिरकार आलाकमान को झुकना ही पड़ा।

पंजाब कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेता भूपेश बघेल और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की कार्यशैली से बेहद नाराज थे। चन्नी गुट का आरोप था कि बघेल प्रभारी पद पर रहते हुए हाईकमान को राज्य की जमीनी हकीकत से गुमराह कर रहे थे। ‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ अभियान के दौरान संगरूर, पटियाला, मुक्तसर और लुधियाना जैसी जगहों पर कार्यकर्ताओं के बीच जमकर लात-घूंसे चले थे और बघेल के सामने ही ‘भूपेश बघेल गो बैक’ के नारे लगे थे। 3 और 4 सितंबर को दिल्ली में हुई बैठकों और राहुल गांधी को सौंपी गई रिपोर्ट के बाद हाईकमान ने 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया। बघेल की रवानगी के बाद अब राजा वड़िंग की कुर्सी पर भी खतरा मंडराने लगा है।

इस फैसले के बाद चरणजीत सिंह चन्नी ने सोशल मीडिया पर पायलट का स्वागत करते हुए हाईकमान का आभार जताया। वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पायलट युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं और उनकी यूथ लीडर वाली छवि का सीधा फायदा पार्टी को पंजाब में मिलेगा। रंधावा ने यह भी कहा कि पायलट की मां पंजाबी हैं, जिससे वे पंजाबी भाषा और संस्कृति को अच्छी तरह समझते हैं। उनके पिता दिवंगत राजेश पायलट के भी पंजाब से बेहद नजदीकी संबंध रहे हैं।

राजस्थान में 2018 के चुनावों के दौरान अपनी संगठनात्मक क्षमता साबित करने वाले सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का ‘संकटमोचक’ माना जा रहा है। खुद राजस्थान के राजनीतिक संकटों से गुजर चुके पायलट के पास गुटबाजी से निपटने का लंबा अनुभव है। पार्टी को उम्मीद है कि 26 साल की उम्र में देश के सबसे युवा सांसद बने और मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके पायलट पंजाब में आपस में बंटे नेताओं के बीच तालमेल बिठाकर संगठन को दोबारा जीवित करेंगे।

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