गुजरात में जहरीली शराब से हुई मौतों पर कांग्रेस का प्रदर्शन: सीएम से जांच की मांग; पूछा- उज्जैन विभाग की सील वहां कैसे पहुंची?

उज्जैन। गुजरात में जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला अब उज्जैन में भी सियासी मुद्दा बन गया है। जिला कांग्रेस ने रेलवे स्टेशन स्थित आबकारी कार्यालय के बाहर धरना दिया।
कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक घंटे तक प्रदर्शन किया। आबकारी अधिकारियों से मामले को लेकर सवाल-जवाब किए और जवाबदेही तय करने की मांग उठाई।
विभाग की सील गुजरात कैसे पहुंची?
विधायक महेश परमार ने गुजरात में जहरीली शराब से हुई मौतों और घायलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि जब्त शराब की 28 पेटियों पर उज्जैन आबकारी विभाग की सील मिली है। परमार ने पूछा कि विभाग की सील गुजरात कैसे पहुंची?
विधायक ने सीएम से की जांच की मांग
कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा कि उज्जैन की पहचान बाबा महाकाल, मां शिप्रा और धार्मिक परंपराओं से है। ऐसे में जहरीली शराब के मामले में शहर का नाम सामने आना बेहद गंभीर और चिंताजनक है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण पर तत्काल स्थिति स्पष्ट करने और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। परमार ने आरोप लगाया कि उज्जैन में पहले भी जहरीली शराब से मौतें हो चुकी हैं। उन्होंने नकली पनीर, दवाइयों, दूषित पानी और मिलावटी घी का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।
विभाग बोला- मामले का उज्जैन से संबंध नहीं
कांग्रेस के आरोपों के बाद आबकारी विभाग ने पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट किया। सहायक जिला आबकारी अधिकारी मनीष बर्वे ने बताया कि गुजरात के एसपी मयूर चावड़ा के अनुसार, जहरीली शराब भावनगर में तैयार की गई थी और वहीं से इसकी बिक्री हुई। विभाग के मुताबिक शुरुआती जांच में इस मामले का उज्जैन से कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है। अधिकारियों ने तथ्यों के आधार पर जांच जारी रहने की बात कही। आबकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि शराब की बोतल पर लगी सील और होलोग्राम की बारीकी से जांच जरूरी है। सील असली है या नकली और उसका स्रोत क्या है, इसकी पड़ताल के बाद ही स्थिति साफ होगी। जांच से यह भी पता चलेगा कि सील उज्जैन आबकारी विभाग से जुड़ी है या नहीं।