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मऊगंज में नदी में बहा मजदूर: 2 घंटे तक पत्थर को पकड़कर बैठा रहा; भारी बारिश के कारण कई इलाकों में भरा पानी

मऊगंज/नईगढ़ी। भारी बारिश के बीच अष्टभुजा नदी के तेज बहाव में एक मजदूर बह गया। वह 2 घंटे तक नदी के बीच एक पत्थर को पकड़कर मदद की गुहार लगाता रहा। रेस्क्यू टीम समय पर नहीं पहुंची। मजदूर का अब तक पता नहीं चल सका है।

निर्माणाधीन भवन की छत पर 3 मजदूर करीब 7 घंटे तक फंसे रहे। नईगढ़ी नगर के कई हिस्सों में पानी भर गया है। घरों और सरकारी परिसरों में पानी घुसने के साथ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।

शीट बचाने के दौरान नदी में बहा मजदूर
अमृत योजना का निर्माण कार्य चल रहा था। एक बाहरी मजदूर नदी में बह रही शीट को बचाने की कोशिश में गिर गया। वह किसी तरह नदी के बीच एक पत्थर को पकड़कर रुक गया।

मजदूर अभी भी लापता 
स्थानीय लोगों के अनुसार, मजदूर 2 घंटे तक पानी के तेज बहाव के बीच फंसा रहा। उसने मदद के लिए आवाज भी लगाई। पुलिया पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। पानी का बहाव तेज होने से कोई भी उसके पास नहीं पहुंच सका। मजदूर तेज धार में बह गया। देर शाम तक उसका पता नहीं चल सका था।

12 किलोमीटर की दूरी तय करने में घंटों लगे
प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि मऊगंज मुख्यालय से नईगढ़ी की दूरी 12 किलोमीटर है। इसके बावजूद रेस्क्यू टीम को पहुंचने में घंटों लग गए। प्रशासनिक अधिकारी, एसडीएम और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। फिर भी समय पर रेस्क्यू नहीं हो सका।

मजदूर की तलाश जारी 
इंजीनियर शौर्य पांडेय ने बताया कि नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था। मजदूर को उसके अन्य साथियों ने रुफ पर आने को बोला था पर वो नहीं आया। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के सभी इंतजाम किए गए है। SDRF की टीम मजदूर की तलाश कर रही है।

सुबह से दोपहर तक छत पर फंसे रहे 3 मजदूर
नईगढ़ी में एक निर्माणाधीन भवन की छत पर 3 मजदूर भी फंस गए। सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक छत पर ही फंसे रहे। चारों ओर पानी और तेज बहाव के कारण नीचे नहीं उतर सके। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अमृत योजना के निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार ने पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए थे। इस मामले में ठेकेदार और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की जांच की मांग हो रही है।

कई इलाकों में घुसा पानी
नईगढ़ी नगर के कई वार्ड जलमग्न हो गए। तहसील कार्यालय और दो छात्रावासों में पानी घुस गया। कई जगह सड़कों पर तेज पानी बहने से लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई। जान जोखिम में डालकर रास्ता पार करना पड़ा। मकानों और दीवारों को भी नुकसान हुआ है। हालात बिगड़ने के बाद कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा।

चेतावनी के बावजूद तैयारी पर उठे सवाल
मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद नईगढ़ी में आपदा से निपटने के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आए। मजदूर के बहने और अन्य श्रमिकों के घंटों तक छत पर फंसे रहने के बाद अब प्रशासन और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। यदि मौसम को लेकर पहले से चेतावनी थी, तो संवेदनशील इलाकों और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? तेज बहाव में फंसे मजदूर को समय पर बचाने के लिए रेस्क्यू व्यवस्था क्यों नहीं पहुंच सकी?

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