EXCLUSIVE: बेटमा पहुंची खनिज विभाग की टीम: कलेक्टर के निर्देश पर अवैध खनन की जांच शुरू; देपालपुर SDM ने मांगी रिपोर्ट

धार। बेटमा क्षेत्र में खनन और स्टोन क्रेशरों के संचालन को लेकर उठे सवालों के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। प्रदेश प्रकाश में खबर प्रकाशित होने के बाद खनिज विभाग की टीम ने बेटमा के सेजवानी, रंगवासा और रावत गांवों का निरीक्षण किया। टीम ने मौके पर पहुंचकर खनन गतिविधियों और स्टोन क्रेशरों के संचालन की जांच शुरू कर दी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में निर्धारित सीमा से अधिक गहरी खुदाई की जा रही है। लगातार हो रही ब्लास्टिंग और धूल प्रदूषण से खेती, मकानों और आसपास के पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। कई किसानों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

एसडीएम ने मांगी खनिज विभाग से रिपोर्ट
देपालपुर एसडीएम चरण सिंह हुड्डा ने बताया कि खनिज विभाग से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित खदानों और स्टोन क्रेशरों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

धूल, ब्लास्टिंग और डंपरों से ग्रामीण परेशान
बेटमा क्षेत्र में लंबे समय से अनुमति से अधिक खनन किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार दिन-रात चल रहे स्टोन क्रेशरों से धूल के गुबार उठ रहे हैं, जबकि पत्थरों से भरे डंपरों की लगातार आवाजाही से गांवों की सड़कों और जनजीवन पर असर पड़ रहा है। भारी मशीनों से हो रही खुदाई के कारण कई स्थानों पर कंपन महसूस होने की भी शिकायत की गई है।

10 से अधिक स्टोन क्रेशर संचालन में होने का दावा
सेजवानी, रंगवासा और रावत गांवों में 10 से अधिक स्टोन क्रेशर संचालित होने की बात ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर स्वीकृत लीज क्षेत्र से बाहर तक खुदाई की जा रही है और खनन गतिविधियां अब कृषि भूमि की सीमाओं तक पहुंचने लगी हैं।

किसान ने सीमांकन कराने की मांग की
सेजवानी निवासी निर्माला बाई, पति केदार खाती ने प्रशासन से अपनी कृषि भूमि का सीमांकन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी जमीन सर्वे नंबर 268/1, 268/2 और 267/1 पर वर्षों से खेती की जा रही है, लेकिन अब तक सीमांकन नहीं हुआ है।
फसल नुकसान की भी शिकायत
निर्माला बाई का आरोप है कि हाल ही में उनकी जमीन से लगे सरकारी सर्वे नंबर का सीमांकन खदान के लिए किया गया, जिससे उनकी फसल को नुकसान पहुंचा। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते स्पष्ट सीमांकन नहीं हुआ तो भविष्य में उनकी निजी जमीन पर भी अवैध उत्खनन हो सकता है।