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वैभव सूर्यवंशी का बल्ला अब तक खामोश, चौथे टी20 में होगी बड़ी पारी की दरकार

दो मुकाबलों में सिर्फ 27 रन, युवा ओपनर से टीम इंडिया को विस्फोटक शुरुआत की उम्मीद

भारत और इंग्लैंड के बीच आज चौथा टी20 मुकाबला खेला जाएगा, जो टीम इंडिया के लिए ‘करो या मरो’ जैसा है। भारत यदि यह मुकाबला हार जाता है तो सीरीज़ भी गंवा देगा। वहीं कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी यह मैच काफी अहम माना जा रहा है। लगातार दूसरे टी20 में हार मिलने की स्थिति में उनकी कप्तानी पर उठ रहे सवाल और तेज हो सकते हैं। ऐसे में टीम इंडिया हर हाल में जीत दर्ज कर सीरीज़ में वापसी करना चाहेगी।

वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी निगाहें

युवा सलामी बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी पर इस मुकाबले में सभी की निगाहें रहेंगी। अब तक खेले गए दो मैचों में वैभव केवल 27 रन ही बना सके हैं, जबकि उनसे तेज और आक्रामक शुरुआत की उम्मीद की जा रही थी। उनकी प्रतिभा पर किसी को संदेह नहीं है, लेकिन अब समय आ गया है कि वह अपनी स्वाभाविक आक्रामक शैली में बल्लेबाज़ी करते हुए बड़ी पारी खेलें। यदि वैभव आज लय में लौटते हैं तो टीम इंडिया को मजबूत शुरुआत मिलने के साथ जीत की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी।

श्रेयस अय्यर की कप्तानी पर उठने लगे सवाल

सीरीज़ के शुरुआती मुकाबलों में टीम इंडिया का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है। गेंदबाज़ों का उपयोग, फील्ड प्लेसमेंट और दबाव के समय लिए गए फैसलों को लेकर कप्तान श्रेयस अय्यर आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। चौथा टी20 उनके लिए भी बड़ी परीक्षा होगा। यदि भारत इस मुकाबले में जीत दर्ज करता है तो उनकी कप्तानी पर उठ रहे सवालों को काफी हद तक विराम मिल सकता है।

गेंदबाज़ों पर भी रहेगी बड़ी जिम्मेदारी

भारतीय गेंदबाज़ी इकाई को इस मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन करना होगा। शुरुआती ओवरों में विकेट निकालना और डेथ ओवरों में रन रोकना टीम की सबसे बड़ी चुनौती होगी। इंग्लैंड के आक्रामक बल्लेबाज़ों को बड़े स्कोर से रोकने के लिए तेज़ गेंदबाज़ों के साथ स्पिनरों को भी अपनी भूमिका बखूबी निभानी होगी। यदि गेंदबाज़ शुरुआत से दबाव बनाने में सफल रहते हैं तो भारत के लिए जीत की राह आसान हो सकती है।

करो या मरो का मुकाबला

भारत के लिए यह सिर्फ एक और टी20 मुकाबला नहीं, बल्कि सीरीज़ बचाने की आखिरी उम्मीद है। बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी और फील्डिंग तीनों विभागों में टीम को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। अनुभवी खिलाड़ियों के साथ-साथ युवा खिलाड़ियों की भूमिका भी निर्णायक रहने वाली है।

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