रतलाम में 5 मिनट रुके नितिन गडकरी, 8 लेन एक्सप्रेसवे का लिया जायजा, पैचवर्क जल्द पूरा करने के निर्देश
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितीन गडकरी गुरुवार सुबह रतलाम जिले की बार्डर पर 5 मिनट रुके। उन्होंने कलेक्टर मिशा सिंह से जिले से गुजर रहे 8 लेन के बारे में बातचीत की। इसके बाद 19 गाड़ियों के काफिले के साथ वह निकल गए। रतलाम जिले से गुजर रहे 8 लेन पर कहीं भी नहीं रुके। उनसे मिलने के लिए कोई बीजेपी का नेता भी नहीं पहुंचा। बता दें कि मंत्री गडकरी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निरीक्षण करने निकले थे।
गडकरी पहले बुधवार रात रतलाम रुकने वाले थे। लेकिन उनके प्रोग्राम में बदलाव के चलते वह मंदसौर जिले के गरोठ में रात रुके थे। गुरुवार सुबह वह 8.15 बजे वहां से रवाना हुए। सुबह 10.25 बजे वह रतलाम जिले के असावती थाना अंतर्गत 8 लेन सीमा पर पहुंचे। प्रोटोकाल के तहत कलेक्टर मिशा सिंह, एसपी अमित कुमार समेत पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी पहले से वहां पहुंच गए।
5 मिनट के लिए गडकरी का काफिला रतलाम सीमा के एंट्री प्वाइंट पर रुका। गडकरी अपनी कार से नीचे उतरे। कलेक्टर व एसपी ने मंत्री की आगवानी की। इस दौरान मंत्री गडगरी ने 8 लेन मार्ग को देखा। चलते हुए कलेक्टर मिशा सिंह से जिले से गुजर रहे 8 लेन के बारे में जानकारी ली। नेशनल हाइवे पर जो पैच वर्क के काम चल रहे है उनको फटाफट कराने को कहा। इसके बाद वह अपने काफिले के साथ रवाना हो गए। जिले में कहीं भी नहीं रुके।
पुलिस बल के साथ चाक चौबंद थी व्यवस्थाएं
नितिन गडकरी के दौरे को देखते हुए 8 लेन पर पुलिस व प्रशासन की व्यवस्था चाक चौबंद थी। 8 लेन पर बाइक व अन्य वाहन सवार कोई नहीं आए। इसके लिए पुलिस बल तैनात कर रखा था। 8 लेन पर गडकरी के काफिले के दौरान कोई बीच में ना आए इसको लेकर भी पुलिस प्रशासन अलग-अलग स्थानों पर बीच में तैनात रहा। रास्ते में कई जगह लोग उनसे मिलकर 8 लेन की खामियां बताना चाहते थे। लेकिन उनका काफिला नहीं रुका। गडकरी बुधवार को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निरीक्षण करने राजस्थान पहुंचे थे। उन्होंने लबान इंटरचेंज (बूंदी) से दरा टनल (कोटा) तक करीब 90KM की दूरी में एक्सप्रेस-वे का निरीक्षण किया। निरीक्षण करते हुए वह बाय रोड गुजरात जा रहे हैं।
झाबुआ क्षेत्र से सीधे गुजरात निकल गए नितिन गडकरी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दो दिवसीय निरीक्षण दौरे पर हैं, जिसके तहत वे 1386 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। गुरुवार को जब गडकरी का काफिला दिल्ली की ओर से मध्य प्रदेश में प्रवेश करता हुआ झाबुआ जिले की सीमा से गुजरा, तो पूरे मार्ग पर प्रशासनिक सक्रियता अपने चरम पर थी। मंत्री के आगमन की आहट मिलते ही एक्सप्रेसवे का प्रबंधन हरकत में आया और आनन-फानन में सड़कों की सफाई के साथ-साथ खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया। दौरे से ठीक पहले की गई इस सक्रियता ने व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस प्रतिबंधित मार्ग पर बाइक, तीन पहिया टेंपो और ट्रैक्टरों का बेरोकटोक आवागमन रहता है, लेकिन मंत्री के गुजरने से पहले वहां परिंदा भी पर नहीं मार सका और सभी प्रतिबंधित वाहन गायब रहे। वहीं, दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर एक्सप्रेसवे पर जिलाध्यक्ष नटवर डोडियार के साथ पहुंचे युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों को मंत्री से मिलने का मौका नहीं मिला। युवक कांग्रेस ने जब अपनी आवाज उठाने का प्रयास किया, तो बीच रास्ते में ही एडिशनल एसपी प्रतिपाल सिंह महोबिया ने उनसे ज्ञापन ले लिया। कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में मुख्य रूप से इथेनॉल के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए देर रात एक्सप्रेसवे पर होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।
मंत्री के इस दौरे को लेकर स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं में भी उत्साह था और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता खजुरी में स्वागत के लिए घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। दरअसल, कयास लगाए जा रहे थे कि मंत्री थांदला और मेघनगर होते हुए जाएंगे, लेकिन उनका काफिला टीमरवानी से सीधे गुजरात की ओर निकल गया। फिलहाल, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा आम जनता के लिए पूरी तरह से नहीं खुला है, लेकिन मंत्री के इस तूफानी निरीक्षण दौरे ने प्रोजेक्ट के जल्द पूर्ण होने की उम्मीदों को जरूर बढ़ा दिया है।