मध्यप्रदेश सरकार हो रही क़र्ज़ की हिस्सेदार ; नए क़र्ज़ के बाद हो जाएगा 4 लाख 99 हज़ार 714 करोड़
मध्यप्रदेश सरकार एक बार फिर बाजार से कर्ज लेने जा रही है। आज यानी 09 जून को सरकार दो अलग-अलग किस्तों में कुल 1800 करोड़ रूपए उधार लेगी। सरकार ने इसके लिए दो राज्य विकास ऋण के री -इश्यू का नोटिफिकेशन जान कर दिया है। यह कर्ज भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिए नीलामी से लिया जाएगा। यह रकम सरकार को 10 जून तक पुनः जारी हो जाएगी।
इस तरह बाटी जाएगी 1800 करोड़ की उधारी
पहली किस्त 1200 करोड़ रुपए की होगी, और इस पर 7.86 प्रतिशत सालाना ब्याज लगेगा। इसकी अवधि 16 साल है और भुगतान 15 अप्रैल 2042 तक हर छह महीने में होगा।
दूसरी किस्त 600 करोड़ रूपए की है। इस पर 7.90 प्रतिशत ब्याज लगेगा। यह कर्ज 30 साल के लिए है और इसका भुगतान 15 अप्रैल 2056 तक हर छह माह में किया जाएगा। यानी यह कर्ज अगली तीन पीढ़ियों तक चुकाया जाएगा।
पहले ही इस साल 11 हजार करोड़ की उधारी हो चुकीं है
इस वित्त वर्ष में सरकार अप्रैल से ही कर्ज उठाना शुरु कर चुकी थी। अप्रैल में 4600 करोड़, मई में 1800 करोड़ और अब जून में फिर 1800 करोड़ रुपए लिए जा रहे हैं। इस तरह चालू वित्त वर्ष में अब तक 11 हजार करोड़ रूपए का कर्ज हो चुका है। पिछले ही वर्षों में सरकार ने मई से कर्ज लेना शुरू कर दिया था। अब इस अप्रैल से फिर उधारी शुरू हो गई है। देखने में यह आता है कि राज्य की वित्तीय जरूरतें पहले से काफी बढ़ चुकी है।
यह मुख्य बिंदु जो जानना ज़रूरी है
- मध्यप्रदेश सरकार आज दो किस्तों में 1800 करोड़ रुपए का कर्ज लेगी
- पहली किस्त 1200 करोड़, दूसरी किस्त 600 करोड़ रुपए की होगी।
- इस वित्त वर्ष में अप्रैल से अब तक कुल ।। हजार करोड़ का कर्ज लिया जा चुका है।
- नए कर्ज के बाद राज्य पर कुल 4 लाख 99 हजार 714 करोड़ का बोझ होगा।
- यह रकम आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म से नीलामी के जरिए मिलेगी।
MP सरकार का पैसा कहां जाएगा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्ज से मिली राशि प्रदेश में उत्पादक विकास कार्यक्रमों और परियोजनाओं में लगाई जाएगी। वहीं, यह भी सच है कि कर्ज का बोझ राज्य की अर्थव्यवस्था पर लगातार बढ़ रहा है। पांच लाख करोड़ के करीब पहुंचा यह आंकड़ा आने वाले वर्षों में राज्य के बजट पर दबाव डालता रहेगा।
