58 करोड़ से अधिक जन धन खातों ने बदली देश की तस्वीर, करोड़ों लोग बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े: निर्मला सीतारमण
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि देश में 58 करोड़ से अधिक जन धन खाते करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में सफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल ने वित्तीय समावेश को नई दिशा दी है और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी लीकेज के सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाना संभव बनाया है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया है। इसके साथ ही कल्याणकारी योजनाओं, कम लागत वाले बीमा और पेंशन योजनाओं का लाभ भी सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है।
वित्तीय समावेश की बड़ी पहल
निर्मला सीतारमण ने कहा कि गरीबी और अभाव के खिलाफ भारत की लड़ाई में जन धन योजना एक महत्वपूर्ण साधन बनकर उभरी है। इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने का लक्ष्य काफी हद तक सफल हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता रही है कि देश का कोई भी नागरिक बैंकिंग सुविधाओं से वंचित न रहे। जन धन खातों ने इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजनाओं में शामिल
प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत 28 अगस्त 2014 को की गई थी। यह दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहलों में से एक मानी जाती है।
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जन धन योजना के तहत खोले गए खातों में लगभग 56 प्रतिशत खाताधारक महिलाएं हैं। वहीं 67 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं, जो योजना की व्यापक पहुंच को दर्शाते हैं।
डीबीटी से सीधे खातों में पहुंचे लाखों करोड़ रुपये
मंत्रालय के मुताबिक, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व्यवस्था के जरिए लाभार्थियों के बैंक खातों में अब तक लगभग 45 लाख करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित किए जा चुके हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक समाप्त हुई है।
वर्तमान में भारत की लगभग 94 प्रतिशत वयस्क आबादी के पास बैंक खाता है, जो वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में देश की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
खाताधारकों को मिलती हैं कई सुविधाएं
जन धन योजना के तहत खोले गए बैंक खातों में खाताधारकों को कई सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इनमें शून्य बैलेंस पर खाता खोलने की सुविधा, मुफ्त रुपे डेबिट कार्ड, दुर्घटना बीमा कवर और ओवरड्राफ्ट सुविधा शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जन धन योजना ने न केवल लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और वित्तीय सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया है। यह योजना आज देश के वित्तीय ढांचे को मजबूत बनाने वाली प्रमुख पहलों में गिनी जाती है।
