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NEET पेपर लीक के बाद NTA का बड़ा फैसला, अब प्रश्न बनाने वाले एक्सपर्ट्स को भी नहीं होगी परीक्षा की जानकारी

NEET पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव

NEET-UG पेपर लीक और हाल के परीक्षा विवादों के बाद देश की परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) अब ऐसी प्रणाली विकसित कर रही है, जिसमें प्रश्न तैयार करने वाले विशेषज्ञों को भी यह जानकारी नहीं होगी कि उनके द्वारा बनाए गए सवाल किस परीक्षा में उपयोग किए जाएंगे।

10 हजार सवालों का बनेगा डिजिटल प्रश्न बैंक

नई व्यवस्था के तहत विषय विशेषज्ञ केवल प्रश्न तैयार करेंगे। इन सभी प्रश्नों को एक बड़े डिजिटल प्रश्न बैंक में सुरक्षित रखा जाएगा। सूत्रों के अनुसार इस प्रश्न बैंक में करीब 10 हजार सवाल शामिल किए जा सकते हैं।

इसके बाद आधुनिक सॉफ्टवेयर और तकनीकी एल्गोरिदम की मदद से विभिन्न परीक्षाओं के लिए अंतिम प्रश्नपत्र तैयार किए जाएंगे। इससे प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और गोपनीयता बढ़ेगी।

पेपर लीक पर लगेगी रोक

सरकार और NTA का मुख्य उद्देश्य प्रश्नपत्र की जानकारी को बेहद सीमित लोगों तक रखना है। नई प्रणाली लागू होने के बाद किसी एक व्यक्ति या समूह के पास पूरे प्रश्नपत्र की जानकारी उपलब्ध नहीं होगी, जिससे पेपर लीक की संभावनाएं काफी हद तक कम हो सकती हैं।

AI करेगा 85 प्रतिशत अनुवाद कार्य

NTA परीक्षा प्रणाली में भाषा अनुवाद प्रक्रिया को भी आधुनिक बनाने जा रही है। नई योजना के तहत लगभग 85 प्रतिशत अनुवाद कार्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किया जाएगा।

हालांकि अंतिम गुणवत्ता जांच और सत्यापन की जिम्मेदारी विषय विशेषज्ञों के पास ही रहेगी, ताकि अनुवाद संबंधी त्रुटियों को कम किया जा सके और विभिन्न भाषाओं में प्रश्नों की सटीकता सुनिश्चित हो सके।

CBSE विवादों के बाद भी बढ़ी सतर्कता

हाल के वर्षों में NEET-UG पेपर लीक और विभिन्न परीक्षा प्रक्रियाओं को लेकर उठे सवालों के बाद परीक्षा एजेंसियों पर पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने का दबाव बढ़ा है। इसी क्रम में NTA तकनीकी सुरक्षा, डिजिटल प्रश्न बैंक और AI आधारित प्रक्रियाओं को अपनाने पर जोर दे रही है।

अधिक सुरक्षित और पारदर्शी होगी परीक्षा प्रक्रिया

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नई व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू होती है, तो प्रश्नपत्र तैयार करने और वितरण प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकती है। इससे लाखों छात्रों के बीच परीक्षा प्रणाली को लेकर विश्वास भी मजबूत होगा और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

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