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अहमदाबाद में 28.94 लाख की फर्जी करेंसी बरामद, हत्या की जांच में उजागर हुआ यूपी-राजस्थान तक फैला नेटवर्क

हत्या की जांच में खुला फर्जी करेंसी नेटवर्क

गुजरात की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद में पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय फर्जी करेंसी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 28.94 लाख रुपये की नकली भारतीय मुद्रा बरामद की है। इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किसी आर्थिक अपराध की जांच से नहीं, बल्कि एक हत्या के मामले की जांच के दौरान हुआ।

वटवा में किराए के मकान से चल रहा था नकली नोट छापने का कारोबार

अहमदाबाद शहर पुलिस के जोन-8 के डीसीपी मयूर पाटिल के अनुसार, वटवा पुलिस थाने में दर्ज हत्या के मामले की जांच के दौरान नकली नोटों के कारोबार से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले। जांच में सामने आया कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड इमरान सब्बीर सिंधा था, जिसने वटवा स्थित सतेज होम्स में एक मकान किराए पर लेकर नकली नोट छापने का सेटअप तैयार किया था।

पुलिस के अनुसार मार्च 2026 से इमरान सिंधा कंप्यूटर, लैपटॉप, कलर प्रिंटर और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से 500-500 रुपये के नकली नोट छाप रहा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि गिरोह लगभग 60 लाख रुपये की फेस वैल्यू वाली नकली करेंसी तैयार कर चुका था।

मास्टरमाइंड की मौत के बाद अलग-अलग राज्यों में छिपे आरोपी

जांच के दौरान पता चला कि मुख्य आरोपी इमरान सिंधा की मृत्यु हो चुकी है। उसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य नकली नोट, प्रिंटिंग मशीन और अन्य उपकरण लेकर विभिन्न राज्यों में फरार हो गए थे। इसके बाद वटवा पुलिस और लोकल क्राइम ब्रांच (एलसीबी) जोन-8 की विशेष टीमों का गठन कर तकनीकी निगरानी के माध्यम से आरोपियों की तलाश शुरू की गई।

यूपी और राजस्थान में छापेमारी, बड़ी बरामदगी

पुलिस जांच के दौरान उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के महेरा चौधरी गांव में आरोपी चंद्रमोहन शर्मा के घर पर छापा मारा गया। यहां से बड़ी मात्रा में नकली नोट, लैपटॉप और अन्य सामग्री बरामद हुई।

वहीं राजस्थान के धौलपुर में आरोपी वीरेंद्र उर्फ वीरू बघेल के रिश्तेदार के घर से कलर प्रिंटर और नकली नोट छापने में उपयोग किए जाने वाले उपकरण जब्त किए गए।

छह आरोपी गिरफ्तार, एक किशोर भी शामिल

पुलिस ने इस मामले में बिहार निवासी सूरज सहानी (20), रविकुमार शाह (23), उत्तर प्रदेश निवासी वीरेंद्र उर्फ वीरू बघेल (25), चंद्रमोहन शर्मा (23), एक किशोर तथा बनासकांठा निवासी मेराज रबारी (49) को गिरफ्तार किया है।

तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मेराज रबारी की भूमिका सामने आने के बाद उसे भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गिरोह के कई सदस्य पहले भी नकली मुद्रा के मामलों में पकड़े जा चुके हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं आरोपियों के नाम

मृतक इमरान सिंधा का नाम पहले सूरत के एक फेक करेंसी मामले में सामने आ चुका था। वहीं मेराज रबारी को भी पूर्व में अदालत द्वारा नकली मुद्रा प्रकरण में दोषी ठहराया जा चुका है। इससे संकेत मिलते हैं कि गिरोह लंबे समय से इस अवैध कारोबार में सक्रिय था।

सप्लाई चेन और नेटवर्क की जांच जारी

डीसीपी मयूर पाटिल ने बताया कि पुलिस अब तक 28.94 लाख रुपये की नकली चलनी नोटें जब्त कर चुकी है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क, उसकी सप्लाई चेन, वित्तीय लेन-देन और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अब तक कितनी नकली मुद्रा बाजार में

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