Adhik Maas 2026: कल से शुरू हो रहा पुरुषोत्तम मास, जानें 15 जून तक क्या करें और किन कामों से बचें

Adhik Maas 2026: कल से शुरू हो रहा पुरुषोत्तम मास, जानें क्या करें और किन कामों से बचें
हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाला अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। इस महीने को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान जप, तप, दान, पूजा-पाठ और भक्ति का विशेष महत्व होता है।
मान्यता है कि जब किसी चंद्र मास में सूर्य संक्रांति नहीं होती, तब अधिक मास पड़ता है। इसे मल मास भी कहा जाता था, लेकिन भगवान विष्णु द्वारा इसे अपना नाम ‘पुरुषोत्तम मास’ दिए जाने के बाद इसका महत्व बढ़ गया।
पुरुषोत्तम मास में क्या करें?
इस पूरे महीने में धार्मिक और सात्विक जीवन अपनाने की सलाह दी जाती है। खासतौर पर ये काम शुभ माने जाते हैं:
- भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करें
- विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस का पाठ करें
- दान-पुण्य करें, जैसे अन्न, वस्त्र, जल और जरूरतमंदों की सहायता
- एकादशी व्रत और भजन-कीर्तन में भाग लें
- रोजाना तुलसी पूजा और दीपदान करें
- सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या अपनाएं
पुरुषोत्तम मास में किन कामों से बचें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने कुछ शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है:
- विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए मांगलिक कार्य
- नया व्यवसाय या बड़े निवेश की शुरुआत (कुछ लोग मान्यता के आधार पर टालते हैं)
- तामसिक भोजन, क्रोध और विवाद से बचना
- झूठ बोलना, अपशब्द और नकारात्मक व्यवहार
क्यों खास माना जाता है पुरुषोत्तम मास?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस महीने में की गई पूजा, तपस्या और दान का कई गुना फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि यह समय आध्यात्मिक उन्नति, आत्मचिंतन और जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- सुबह जल्दी उठकर स्नान और पूजा करें
- पीपल, तुलसी और गाय की सेवा को शुभ माना जाता है
- जरूरतमंदों को भोजन कराने और जल सेवा का विशेष महत्व है
- मन को शांत रखें और नकारात्मक सोच से दूरी बनाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु की कृपा पाने और जीवन में सकारात्मकता लाने का विशेष अवसर माना जाता है, इसलिए भक्त इस पूरे महीने भक्ति, संयम और सेवा भाव को महत्व देते हैं।






