नेपाल की चाय उद्योग पर संकट: प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से निर्यात बाधाएं दूर करने की मांग

भारत के नए नियम से नेपाल की चाय उद्योग संकट में, पीएम बालेन्द्र शाह से हस्तक्षेप की मांग
काठमांडू। भारत द्वारा एक मई से लागू नई ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP)’ के बाद नेपाल की चाय उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रही है। नेपाली चाय व्यवसायियों ने इस मुद्दे के समाधान के लिए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
नई व्यवस्था के तहत भारत में प्रवेश करने वाली नेपाली चाय की हर खेप और प्रत्येक ट्रक की अलग-अलग लैब टेस्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। व्यापारियों का कहना है कि इससे निर्यात प्रक्रिया धीमी हो गई है और कारोबार पर गंभीर असर पड़ा है।
आधे महीने से लगभग ठप पड़ा निर्यात
नेपाल चाय उत्पादक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता के अनुसार, नए नियम लागू होने के बाद पिछले करीब आधे महीने से चाय निर्यात लगभग बंद है। उन्होंने बताया कि इस दौरान भारतीय खरीदारों ने अपने जोखिम पर बेहद सीमित मात्रा में केवल दो ट्रक चाय खरीदी है, जिसमें तराई क्षेत्र की 10–12 टन और पहाड़ी क्षेत्र की 4–5 टन चाय शामिल रही।
गुप्ता ने कहा कि फिलहाल चाय उत्पादन का सीजन शुरू हुआ है, इसलिए अभी नुकसान सीमित है, लेकिन अच्छी बारिश के कारण अगले एक सप्ताह में उत्पादन तेजी से बढ़ने की संभावना है। यदि तब तक निर्यात में राहत नहीं मिली, तो भंडारण की कमी के कारण किसानों और उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
“सीमा पर 15 दिन रुकी चाय की गुणवत्ता खराब हो सकती है”
नेपाल टी एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल मैनाली ने कहा कि भारत के नए नियमों से व्यापारियों का जोखिम काफी बढ़ गया है। उनका कहना है कि यदि चाय 15 दिनों तक सीमा पर रुकी रहती है, तो उसकी गुणवत्ता खराब होने का खतरा रहता है।
मैनाली ने कहा कि लैब टेस्ट की रिपोर्ट आने से पहले चाय बेचना संभव नहीं है और यदि कोई खेप टेस्ट में फेल हो जाती है, तो उसे नष्ट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। साथ ही ऐसी चाय को नेपाल वापस लाने पर 40 प्रतिशत कस्टम शुल्क और 13 प्रतिशत वैट देना होगा, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पीएम स्तर पर हस्तक्षेप की मांग
व्यवसायियों का कहना है कि नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास ने भारत के वाणिज्य मंत्रालय और भारतीय चाय बोर्ड के साथ बातचीत कर अवरोध दूर करने की कोशिश की है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
चाय उद्योग से जुड़े संगठनों ने मांग की है कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह सीधे भारत सरकार से उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद करें, जैसा पहले भी ऐसे मामलों में किया जाता रहा है। उनका मानना है कि केवल प्रशासनिक या कूटनीतिक प्रयासों से यह समस्या हल होती नहीं दिख रही, इसलिए उच्च राजनीतिक हस्तक्षेप अब बेहद जरूरी हो गया है।






