नेपाल में विपक्षी दलों को प्रधान न्यायाधीश के पद पर मनोज शर्मा के नाम की सिफारिश पर आपत्ति

नेपाल में प्रधान न्यायाधीश पद के लिए डॉ. मनोज शर्मा के नाम की सिफारिश को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस फैसले का विरोध करते हुए सरकार पर न्यायपालिका में हस्तक्षेप और लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
डॉ. मनोज शर्मा के नाम की सिफारिश गुरुवार को सिंह दरबार में हुई संवैधानिक परिषद की बैठक में की गई थी। हालांकि वरिष्ठता क्रम में वे चौथे स्थान पर हैं, जिसके कारण इस निर्णय पर सवाल उठने लगे हैं। बैठक में राष्ट्रीय सभा अध्यक्ष नारायण प्रसाद दाहाल और प्रमुख विपक्षी नेता भीष्म राज अंगदेम्बे ने अपनी असहमति दर्ज कराई थी।
विपक्षी नेता अंगदेम्बे ने पत्रकार सम्मेलन में कहा कि न्यायपालिका की परंपराओं और मूल्यों को तोड़ते हुए प्रधानमंत्री द्वारा यह प्रस्ताव लाया गया, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं नेपाली कांग्रेस के महामंत्री प्रदीप पौडेल ने सरकार पर शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत को कमजोर करने का आरोप लगाया।
यूएमएल के उपाध्यक्ष रघुजी पंत ने कहा कि वरिष्ठता क्रम की अनदेखी कर कार्यपालिका ने न्यायपालिका में हस्तक्षेप किया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश एक सक्षम महिला प्रधान न्यायाधीश पाने से वंचित रह गया। उनके अनुसार इस तरह के फैसले न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर असर डाल सकते हैं।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश ज्वाला ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों और परंपराओं को तोड़ते हुए सर्वसत्तावादी रवैया अपना रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस फैसले से देश की न्याय व्यवस्था में अस्थिरता और विवाद बढ़ सकता है।






