अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, कच्चे तेल में जोरदार उछाल; ट्रंप बोले- सीजफायर अभी भी जारी

अमेरिका और ईरान के बीच फारस की खाड़ी में ताजा सैन्य झड़पों के बाद वैश्विक तेल बाजार में फिर उथल-पुथल मच गई है। WTI Crude की कीमतों में एशियाई कारोबार के दौरान 4 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली और यह 99 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।

वहीं Brent Crude भी शुरुआती गिरावट से उबरकर फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बंद हुआ।

फारस की खाड़ी में फिर तनाव

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी गाइडेड-मिसाइल युद्धपोतों पर ईरान की ओर से “उकसावे वाली कार्रवाई” की गई, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में कार्रवाई की गई।

हालांकि अमेरिकी सेना ने कहा कि वह तनाव बढ़ाना नहीं चाहती, लेकिन अमेरिकी बलों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

उधर Donald Trump ने ABC News से बातचीत में कहा कि संघर्ष विराम अभी भी लागू है और हालिया घटनाक्रम को उन्होंने “लव टैप” बताया।

ईरान का पलटवार दावा

ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने पहले आक्रामक कार्रवाई शुरू की थी। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि जवाबी कार्रवाई में कुछ अमेरिकी जहाजों को नुकसान पहुंचा।

फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के संकेत स्पष्ट नहीं हैं, जिससे ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट गहराया

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक Strait of Hormuz से सामान्य स्तर पर जहाजों की आवाजाही बहाल नहीं होती, तब तक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सीमित रहेगी।

Shell के CEO वाएल सावन ने चेतावनी दी कि वैश्विक तेल बाजार इस समय 1 अरब बैरल की कमी का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि जलडमरूमध्य बंद रहने से स्थिति हर दिन और गंभीर होती जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर होर्मुज जल्द खुल भी जाता है, तब भी सप्लाई को सामान्य स्तर पर लौटने में लंबा समय लग सकता है। कई बड़ी तेल कंपनियों के अधिकारियों ने भी इसी तरह की चिंता जताई है।

वैश्विक बाजारों पर असर

तेल कीमतों में तेजी का असर वैश्विक शेयर बाजारों और मुद्रास्फीति की चिंताओं पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो ऊर्जा कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।

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