भारत में सोने के आयात में भारी गिरावट, टैक्स और लाइसेंस संकट से बाजार प्रभावित

India के सोना बाजार में इस समय बड़ी चुनौती देखने को मिल रही है। अप्रैल में देश के गोल्ड इंपोर्ट में भारी गिरावट दर्ज की गई और मई में भी स्थिति में सुधार के संकेत नहीं मिल रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार टैक्स बढ़ोतरी, आयात लाइसेंस में देरी और नीतिगत अनिश्चितता ने देश के बुलियन बाजार को दबाव में ला दिया है। इसका असर ऐसे समय में देखने को मिल रहा है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी हैं।
बाजार सूत्रों का कहना है कि आयात प्रक्रियाओं में देरी के कारण कई ज्वेलर्स और ट्रेडर्स को पर्याप्त स्टॉक नहीं मिल पा रहा है। इससे घरेलू बाजार में सप्लाई प्रभावित हुई है और कई स्थानों पर सोने की उपलब्धता सीमित हो गई है।
सोने पर बढ़े टैक्स बोझ ने भी कारोबारियों की चिंता बढ़ाई है। ऊंची लागत के कारण मांग और सप्लाई के बीच असंतुलन पैदा हो रहा है। दूसरी ओर, आयात लाइसेंस जारी होने में देरी से कारोबारियों को नए ऑर्डर पूरे करने में परेशानी हो रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि सरकार की नीतिगत अस्पष्टता ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। बुलियन ट्रेडर्स अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में आयात नियमों और टैक्स ढांचे में कोई राहत मिलेगी या नहीं।
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। ऐसे में आयात में आई गिरावट का असर ज्वेलरी उद्योग, बुलियन ट्रेड और त्योहारी मांग पर भी पड़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द नीति स्पष्ट नहीं हुई और लाइसेंस प्रक्रिया में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले महीनों में घरेलू सोने के बाजार में कीमतों और सप्लाई दोनों पर दबाव और बढ़ सकता है।






