छत्तीसगढ़ का तर्रेम बना स्वास्थ्य मॉडल, राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल

Chhattisgarh के बस्तर संभाग में स्थित Bijapur district, Chhattisgarh का ग्राम तर्रेम, जो कभी माओवादी प्रभाव के कारण पिछड़े और संवेदनशील क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है।
जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते ग्रामीणों का भरोसा मजबूत हुआ है। यहां स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में प्रतिदिन 25 से 30 मरीजों की ओपीडी, सुरक्षित प्रसव सेवाएं और नियमित लैब जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
Ayushman Bharat योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ 102 और 108 एम्बुलेंस सेवाओं ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया है, जिससे आपातकालीन सेवाएं तेजी से उपलब्ध हो रही हैं।
इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिली है। कलेक्टर संबित मिश्रा के मार्गदर्शन में और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीआर पुजारी के नेतृत्व में तर्रेम स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
Sambit Mishra की निगरानी में यह मूल्यांकन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया, जिसमें स्वास्थ्य केंद्र को 88.19 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए।
मूल्यांकन के दौरान केंद्र की 12 स्वास्थ्य सेवाओं की जांच की गई, जिसमें स्टाफ की कार्यकुशलता, स्वच्छता, मरीजों के प्रति व्यवहार और राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन जैसे मानकों पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस सफलता में स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों, मितानिनों, एएनएम और अन्य स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में योगदान दिया।
तर्रेम की यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह दर्शाती है कि सही नीति और प्रशासनिक प्रयासों से पिछड़े क्षेत्रों में भी बड़े बदलाव संभव हैं।






