राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम 2.0 लॉन्च, बच्चों के समग्र विकास के लिए नए दिशानिर्देश जारी

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने रविवार को राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम 2.0 के नए और संशोधित दिशानिर्देश जारी किए। यह पहल देश में बच्चों के स्वास्थ्य और समग्र विकास को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पहले से लागू ‘4-डी मॉडल’ को और अधिक मजबूत बनाना है। इस मॉडल के अंतर्गत जन्मजात दोष, रोग, कमियां, कुपोषण और विकासात्मक विलंब जैसी प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
नए दिशानिर्देशों में आधुनिक समय की चुनौतियों को भी शामिल किया गया है। इनमें गैर-संक्रामक रोग, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और व्यवहार संबंधी विकार प्रमुख हैं। इस तरह अब यह कार्यक्रम पारंपरिक बीमारियों के साथ-साथ बदलती जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं पर भी फोकस करेगा।
संशोधित ढांचे के तहत बच्चों के लिए निवारक (Preventive), प्रोत्साहक (Promotive) और उपचारात्मक (Curative) सेवाओं की व्यापक व्यवस्था की गई है। यह कार्यक्रम जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों को कवर करता है और जीवनचक्र-आधारित दृष्टिकोण को और अधिक प्रभावी बनाता है।
मंत्रालय ने बताया कि इन दिशानिर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भी समन्वय में काम करेंगे। स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को स्क्रीनिंग, जागरूकता और शुरुआती पहचान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का यह नया संस्करण






