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इतिहास के पन्नों में 27 अप्रैल: नेशनल डिफेंस कॉलेज की स्थापना, रणनीतिक सोच को नई दिशा

नई दिल्ली। भारत के रक्षा इतिहास में 27 अप्रैल का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी दिन National Defence College (एनडीसी) की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जिसने देश की सुरक्षा नीति और रणनीतिक सोच को नई दिशा दी।

भारत सरकार ने 1959 में ब्रिटेन के इम्पीरियल डिफेंस कॉलेज की तर्ज पर इस संस्थान की स्थापना का निर्णय लिया था। इसका उद्घाटन देश के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru ने किया था। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के बौद्धिक विकास का केंद्र बताया।

नई दिल्ली स्थित यह संस्थान देश का सर्वोच्च रणनीतिक प्रशिक्षण केंद्र माना जाता है, जहां सेना, नौसेना, वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। इसके अलावा कई देशों के अधिकारी भी यहां प्रशिक्षण लेते हैं, जिससे यह एक अंतरराष्ट्रीय मंच बन गया है।

इस संस्थान के पहले कमांडेंट K. V. Krishna Rao थे, जिन्होंने इसकी मजबूत नींव रखी। आज यह संस्थान भारत की सुरक्षा और नीति निर्माण में एक महत्वपूर्ण थिंक टैंक के रूप में कार्य कर रहा है।

 महत्वपूर्ण घटनाचक्र

  • 1942: अमेरिका के ओकलाहोमा में तूफान से 100 लोगों की मौत।
  • 1960: नई दिल्ली में नेशनल डिफेंस कॉलेज की शुरुआत।
  • 1972: अंतरिक्ष यान ‘अपोलो 16’ पृथ्वी पर लौटा।
  • 1989: बांग्लादेश में तूफान से 500 लोगों की मौत।
  • 1999: यूनेस्को ने ‘अरिरंग’ पुरस्कार की घोषणा की।
  • 2005: फ्रांस के टुलुज में एयरबस A-380 की पहली परीक्षण उड़ान।
  • 2010: Unique Identification Authority of India ने ‘आधार’ नाम और लोगो पेश किया।
  • 2011: अमेरिका के राष्ट्रपति Barack Obama ने जन्म प्रमाण पत्र सार्वजनिक किया।
  • 2017: Vinod Khanna का निधन।

 जन्म

  • 1820: हरबर्ट स्पेंसर – प्रसिद्ध दार्शनिक और समाजशास्त्री
  • 1912: Zohra Sehgal – अभिनेत्री और रंगमंच कलाकार
  • 1920: मनीभाई देसाई – स्वतंत्रता सेनानी
  • 1931: स्वामी विश्वेशतीर्थ – पेजावर मठ के प्रमुख
  • 1947: Harish Rawat
  • 1949: P. Sathasivam

निधन

  • 1930: टी. के. माधवन – समाज सुधारक
  • 1998: गुयेन वैन लिंह – वियतनाम नेता
  • 2009: Feroz Khan
  • 2010: हेमंत दास – उड़िया फिल्म अभिनेता
  • 2017: Vinod Khanna
  • 2021: मनोज दास – उड़िया साहित्यकार

27 अप्रैल का यह दिन न केवल ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ा है, बल्कि भारत की रणनीतिक और सुरक्षा सोच को आकार देने वाले महत्वपूर्ण पड़ावों का भी प्रतीक है।

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