Shanta Kumar बोले— दलबदल कानून अपने उद्देश्य में विफल, पुनर्विचार की जरूरत

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री Shanta Kumar ने कहा है कि भारत में जिस भावना के साथ दलबदल कानून बनाया गया था, वह अपने उद्देश्य को पूरा करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है।
उन्होंने वर्तमान कानून की खामियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में कई कमियां हैं। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अकेले नियम तोड़ता है तो उस पर कार्रवाई होती है, लेकिन जब समूह में दलबदल होता है तो प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती।
शांता कुमार ने उदाहरण देते हुए कहा कि Aam Aadmi Party के राज्यसभा के सात सांसदों के मामले में दलबदल के बावजूद कार्रवाई न होना इस कानून की कमजोरियों को उजागर करता है।
उन्होंने देश की राजनीति के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले राजनीति सेवा, ईमानदारी और राष्ट्रहित के लिए की जाती थी, लेकिन आज यह सत्ता और पद तक सीमित होकर रह गई है।
उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि Bhagat Singh जैसे देशभक्तों ने राष्ट्रहित के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, जबकि आज की राजनीति में व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थ हावी हो गया है।
शांता कुमार ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से अपील की कि दलबदल कानून पर पुनर्विचार किया जाए और ऐसे प्रावधान जोड़े जाएं, जिससे सामूहिक दलबदल को भी स्पष्ट रूप से दंडनीय बनाया जा सके।






