महिला आरक्षण बिल पर सियासत तेज: सीएम रेवंत रेड्डी ने केंद्र की मंशा पर उठाए सवाल

महिला आरक्षण बिल को लेकर देश में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस बीच Revanth Reddy ने केंद्र सरकार और Bharatiya Janata Party की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण को “मुखौटा” बनाकर परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा में विपक्ष की एकजुटता के चलते भाजपा की रणनीति सफल नहीं हो पाई।
रेड्डी ने कहा कि भाजपा का “400 पार” नारा उसकी मंशा को स्पष्ट करता है और इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी संविधान में बदलाव करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा करके B. R. Ambedkar द्वारा दिए गए आरक्षण प्रावधानों को प्रभावित किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अब विपक्ष पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस लगातार इस बिल का समर्थन करती रही है। रेड्डी ने कांग्रेस के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी ने महिलाओं को प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और राज्यपाल जैसे उच्च पदों पर अवसर दिए हैं।
रेड्डी ने पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi का उल्लेख करते हुए कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को आरक्षण देने का श्रेय कांग्रेस को जाता है। इसके विपरीत उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी ने अब तक किसी महिला को अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनाया।
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में संशोधन के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, और भाजपा इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए परिसीमन जैसे कदम उठा सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परिसीमन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही, तो इसका असर भविष्य में आरक्षण व्यवस्था पर पड़ सकता है।






