केंद्र सरकार ने खनिज रियायत नियमावली में किया बड़ा संशोधन, निम्न श्रेणी के लौह अयस्क को मिलेगा बढ़ावा

केंद्र सरकार ने खनन क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए खनिज रियायत नियमावली में महत्वपूर्ण संशोधन अधिसूचित किए हैं। इस बदलाव का उद्देश्य निम्न श्रेणी के लौह अयस्क के उपयोग को बढ़ावा देना और इस्पात उद्योग को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

Ministry of Mines के अनुसार, 10 अप्रैल को खनिज (परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों को छोड़कर) रियायत (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए गए।

⚙️ क्या है नया बदलाव

संशोधन के तहत 45 प्रतिशत से कम लौह (Fe) सामग्री वाले हेमेटाइट लौह अयस्क के लिए औसत विक्रय मूल्य (ASP) तय करने की नई कार्यप्रणाली लागू की गई है। इसमें बैंडेड हेमेटाइट क्वार्टजाइट (BHQ) और बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (BHJ) जैसे निम्न ग्रेड अयस्क भी शामिल हैं।

📊 मूल्य निर्धारण का नया फॉर्मूला

  • 35%–45% Fe वाले अयस्क का ASP → 45%–51% ग्रेड के ASP का 75%
  • 35% से कम Fe वाले अयस्क का ASP → उसी मानक का 50%

इससे पहले निम्न श्रेणी के अयस्क के लिए अलग मूल्य निर्धारण प्रणाली नहीं थी, जिससे उनका परिशोधन आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं माना जाता था।

🏭 उद्योग को क्या फायदा

सरकार का मानना है कि इस कदम से:

  • निम्न श्रेणी के अयस्क का बेहतर उपयोग होगा
  • उच्च गुणवत्ता वाले संसाधनों पर दबाव कम होगा
  • इस्पात उद्योग को कच्चे माल की स्थिर आपूर्ति मिलेगी

🌱 संरक्षण और आत्मनिर्भरता पर जोर

मंत्रालय के अनुसार यह संशोधन खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक और इष्टतम उपयोग को बढ़ावा देगा। साथ ही, इससे देश में लौह अयस्क के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और खनिज संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

यह कदम खनन क्षेत्र में सुधार और दीर्घकालिक औद्योगिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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