खेलो इंडिया से पारंपरिक खेलों को मिला नया सम्मान, भारत में खेलों का नया युग शुरू: राजनाथ सिंह

Rajnath Singh ने कहा है कि Khelo India अभियान ने देश के पारंपरिक खेलों को नई पहचान और सम्मान दिलाया है। उन्होंने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में भारत में खेलों का एक नया युग शुरू हुआ है।
लखनऊ के K. D. Singh Babu Stadium में आयोजित सांसद खेल महाकुंभ को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि गटका, मल्लखंब, थांग-टा, कलरीपयट्टू और योगासन जैसी पारंपरिक खेल विधाओं को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार स्कॉलरशिप भी दे रही है।
Rajnath Singh ने कहा कि देशभर में करीब 1000 खेलो इंडिया सेंटर्स स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि लगभग दो दर्जन नेशनल सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस भी खोले जा चुके हैं। इन केंद्रों पर खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण और स्पोर्ट्स साइंस का सहयोग दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्यों में स्पोर्ट्स आधारित उच्च शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। Uttar Pradesh का उदाहरण देते हुए उन्होंने Major Dhyan Chand Sports University का उल्लेख किया, जो खेल शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम है।
रक्षामंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेल को विषय के रूप में शामिल किया गया है, जिससे युवाओं में खेलों के प्रति रुचि बढ़ेगी। साथ ही Khelo India Women’s League के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि देश में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार लगभग 5000 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, जिससे गांवों और दूरदराज के इलाकों में भी आधुनिक खेल सुविधाएं विकसित हो रही हैं।
Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार खेल और खिलाड़ियों से जुड़ी समस्याओं का समाधान कर रही है, जिससे भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत खेल शक्ति के रूप में उभर रहा है।
इस कार्यक्रम में Brajesh Pathak, Girraj Singh Yadav, Sanjay Seth और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
रक्षामंत्री ने जोर देकर कहा कि समाज में खेलों और खिलाड़ियों के महत्व को समझते हुए उन्हें आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर देना जरूरी है, ताकि भारत वैश्विक खेल मंच पर अपनी अलग पहचान बना सके।






