इस्लामाबाद में 15 घंटे की मैराथन वार्ता: अमेरिका–ईरान लेबनान और होर्मुज पर अटके, आज फिर होगी बातचीत

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के तहत हुई लंबी शांति वार्ता 15 घंटे तक चलने के बाद भी किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। वार्ता का मुख्य फोकस लेबनान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अटका रहा, जिसके चलते दोनों पक्ष किसी समझौते पर सहमत नहीं हो पाए।
सूत्रों के अनुसार, शनिवार दोपहर से शुरू हुई यह बातचीत रविवार तड़के तक चली और इस दौरान कई बार मसौदों का आदान-प्रदान भी किया गया। हालांकि, ईरान ने अमेरिकी पक्ष पर अनुचित मांगें रखने का आरोप लगाया, जबकि अमेरिका ने स्पष्ट किया कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक किसी ठोस प्रगति की संभावना कम है।
वार्ता में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर बनाए रखने में अहम योगदान दिया। इस दौरान पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों ने किसी भी आधिकारिक टिप्पणी से परहेज किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज एक बार फिर दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल बातचीत करेंगे।
इस उच्चस्तरीय बैठक को 1979 की ईरानी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयासों में से एक माना जा रहा है। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति और विशेष दूतों का प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा, जबकि ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष और विदेश मंत्री ने नेतृत्व किया।
इसी बीच, लेबनान को लेकर भी एक बड़ा कूटनीतिक संकेत सामने आया है, जहां इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्थायी शांति समझौते की इच्छा जताई है, हालांकि उन्होंने हिजबुल्लाह के खिलाफ सख्त शर्तें भी रखी हैं।
फिलहाल इस्लामाबाद वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह बैठक पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा संकट की दिशा तय कर सकती है।






