आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% पर रखा बरकरार, एमपीसी का सर्वसम्मति से फैसला

Reserve Bank of India (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बैठक में नीतिगत दर रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया है।

आरबीआई के गवर्नर Sanjay Malhotra ने तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है।

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति शृंखला पर उसके प्रभाव के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि, Iran से जुड़े संकट के कारण महंगाई पर जोखिम बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और विकास दर को सहारा देना अधिक जरूरी है।

क्या होता है रेपो रेट?

रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराता है। इसका सीधा असर होम लोन, ऑटो लोन, ईएमआई और बचत पर पड़ता है।

गौरतलब है कि इससे पहले फरवरी 2026 की एमपीसी बैठक में भी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही स्थिर रखा गया था। हालांकि, फरवरी 2025 से अब तक आरबीआई कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। आखिरी बार दिसंबर 2025 में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और महंगाई के जोखिम को देखते हुए आरबीआई का यह फैसला संतुलित और सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाता है।

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