सीजफायर के बाद कच्चे तेल में भारी गिरावट, WTI 17% तक टूटा

United States, Iran और Israel के बीच जारी तनाव में सीजफायर के ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत में करीब 17 प्रतिशत तक की गिरावट आई, जिससे यह लगभग 91 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। वहीं ब्रेंट क्रूड भी लुढ़ककर 91.88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया।
इससे पहले पिछले सत्र में ब्रेंट क्रूड 109.27 डॉलर और WTI 112.95 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। भारतीय समयानुसार सुबह के कारोबार में भी दोनों बेंचमार्क में दो अंकों की गिरावट देखी गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह गिरावट Donald Trump द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्ष विराम की घोषणा के बाद आई है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि ईरान के साथ विवादित मुद्दों पर सहमति बनी है और होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से खोलने पर भी चर्चा हुई है।
Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इस क्षेत्र में तनाव के कारण पहले तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था, लेकिन सीजफायर के बाद बाजार में राहत देखने को मिली है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट स्थायी नहीं हो सकती। युद्ध के कारण प्रभावित ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से सामान्य होने में समय लगेगा, जिससे आने वाले दिनों में कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच सकती हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। भारत जैसे आयातक देशों के लिए ऊंची कीमतें चालू खाता घाटा, महंगाई और मुद्रा पर दबाव बढ़ा सकती हैं, जबकि गिरावट से कुछ राहत मिलती है।






