अनाथ होने के दर्द से उभरे इसाक मालसावमटलुआंगा, चोट के बावजूद केआईटीजी में जीता स्वर्ण

मिजोरम के युवा वेटलिफ्टर इसाक मालसावमटलुआंगा ने जीवन की कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। कम उम्र में माता-पिता को खोने और चोट से जूझने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
💔 कम उम्र में टूटा परिवार, डगमगाया करियर
इसाक ने 16 वर्ष की उम्र से पहले ही अपने माता-पिता दोनों को खो दिया था। इस गहरे आघात के बाद वह लगभग वेटलिफ्टिंग छोड़ने का मन बना चुके थे।
लेकिन उनके बचपन के कोच और चाचा-चाची ने उन्हें संभाला और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
🏋️♂️ चोट के बावजूद शानदार प्रदर्शन
पीठ की चोट से जूझ रहे इसाक ने प्रतियोगिता में जबरदस्त वापसी की।
- स्नैच में दूसरा स्थान
- कुल 235 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक हासिल
उनका यह प्रदर्शन उनके जज़्बे और मेहनत का प्रतीक रहा।
👨👩👦 परिवार बना सबसे बड़ी ताकत
इसाक के पिता का 2018 में सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था, जबकि 2024 में उनकी मां का कैंसर से देहांत हो गया।
इस कठिन समय में उनके चाचा-चाची ने—
- उन्हें अपने साथ रखा
- पढ़ाई और प्रशिक्षण जारी रखने में मदद की
जीत के बाद चाचा का उन्हें गले लगाना भावुक पल बन गया।
📚 खेल के साथ पढ़ाई भी जारी
इसाक वर्तमान में भारतीय खेल प्राधिकरण के इम्फाल स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
साथ ही वह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय के माध्यम से कक्षा 12 की पढ़ाई भी कर रहे हैं।
🏅 लगातार बेहतर होता प्रदर्शन
- 2024: यूथ नेशनल में रजत पदक
- 2025: जूनियर प्रतियोगिता में रजत
- 2025: राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कांस्य
अब 2026 में उन्होंने स्वर्ण जीतकर अपनी पहचान और मजबूत कर ली है।
🌟 संघर्ष से सफलता तक की कहानी
इसाक की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि—
- दर्द से लड़ने
- हार न मानने
- और सपनों को जिंदा रखने
की प्रेरणा है।






