राज्यसभा में उठा धर्मांतरण का मुद्दा, सख्त कानून और संविधान संशोधन की मांग

Rajya Sabha में शुक्रवार को धर्मांतरण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा, जहां सख्त कानून बनाने और संविधान में संशोधन की मांग की गई।
🏛️ सांसद ने उठाया मुद्दा
भारतीय जनता पार्टी के सांसद Sumer Singh Solanki ने आदिवासी क्षेत्रों में हो रहे धर्मांतरण को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने कहा:
- धार्मिक स्वतंत्रता सभी को है
- लेकिन छल, बल और प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण अपराध है
⚖️ संविधान संशोधन की मांग
सोलंकी ने सुझाव दिया कि:
- धर्मांतरण रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया जाए
- जो आदिवासी धर्मांतरित हो चुके हैं, उनका आरक्षण समाप्त किया जाए
- ऐसे लोगों की डिलिस्टिंग की जाए
उन्होंने कहा कि इससे जनजातीय समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
🌿 आदिवासी पहचान पर खतरे की बात
सांसद ने कहा कि धर्मांतरण से:
- जनजातीय संस्कृति और परंपराएं प्रभावित हो रही हैं
- रीति-रिवाज और पूजा पद्धति बदल रही है
- समाज की पहचान कमजोर हो रही है
⚠️ गंभीर आरोप और चिंताएं
सोलंकी ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर:
- आर्थिक लालच (नौकरी, इलाज, शिक्षा) देकर
- डर और भ्रम फैलाकर
- विवाह के माध्यम से
- सामूहिक रूप से धर्मांतरण कराया जा रहा है
उन्होंने इसे संगठित अपराध की श्रेणी में रखने की बात कही।
देशव्यापी कानून की मांग
सोलंकी ने कहा कि कुछ राज्यों में पहले से कानून मौजूद हैं, लेकिन पूरे देश में एक कड़ा और एक समान कानून होना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा केवल सामाजिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय बनता जा रहा है।
📢 सामाजिक संगठनों की भी मांग
सांसद के अनुसार, कई सामाजिक संगठनों और जनजातीय प्रतिनिधियों ने भी धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।
यह मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन सकता है, जहां धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच संतुलन पर चर्चा तेज होने की संभावना है।






