देश की अर्थव्यवस्था पर पश्चिम एशिया संकट का कितना असर होगा, यह भी बताए सरकारः मनीष तिवारी

कांग्रेस सांसद Manish Tewari ने पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच सरकार से भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के कारण बजट के मूल आधार अब कमजोर हो चुके हैं और देश को जल्द ही नई आर्थिक वास्तविकता का सामना करना पड़ सकता है।
बजट अनुमानों पर उठाए सवाल
लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान तिवारी ने कहा कि 1 फरवरी को पेश किया गया बजट जिन अनुमानों पर आधारित था, वे 28 फरवरी के बाद बदल चुके हालात में अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं।
उन्होंने सरकार से पूछा कि—
- तेल, एलएनजी, खाद्यान्न और दवाइयों की कीमतों पर कितना असर पड़ेगा
- राजस्व और वित्तीय घाटे पर क्या प्रभाव होगा
तेल कीमतों में तेज उछाल
तिवारी के अनुसार—
- फरवरी 2026 में कच्चा तेल: करीब 70 डॉलर प्रति बैरल
- मार्च 2026 में: 119 डॉलर प्रति बैरल से अधिक
उन्होंने कहा कि तेल कीमतों में हर 10 डॉलर की वृद्धि से भारत पर 10-15 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
भारत की निर्भरता भी बढ़ी है—
- कच्चा तेल आयात: 77% से बढ़कर 88%
- एलएनजी आयात: 30% से बढ़कर 45-47%
बढ़ता कर्ज और आर्थिक दबाव
तिवारी ने बताया कि—
- 2013-14 में कुल कर्ज: ₹56.51 लाख करोड़
- 2026 में: ₹214.8 लाख करोड़
केंद्र और राज्यों का संयुक्त ऋण-से-जीडीपी अनुपात 84.2% तक पहुंच गया है, जो FRBM सीमा (60%) से काफी अधिक है।
टैक्स कलेक्शन में कमी
सरकार के अनुमान और वास्तविक आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया—
- कुल टैक्स वृद्धि अनुमान: 13%, वास्तविक: 3%
- आयकर अनुमान: 17%, वास्तविक: 6%
- अप्रत्यक्ष कर: -1% (घटोतरी)
इसके चलते सरकार को 17 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लेना पड़ा।
निजी निवेश पर सवाल
तिवारी ने कहा कि कॉर्पोरेट टैक्स दर घटाकर 18.85% करने के बावजूद निजी निवेश में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अर्थव्यवस्था अब सरकारी पूंजीगत व्यय (₹17.14 लाख करोड़) पर निर्भर हो गई है।
रुपये और विदेशी निवेश पर असर
- 2014 में डॉलर के मुकाबले रुपया: ₹60.99
- 2026 में: ₹93.34
तिवारी ने कहा कि हाल के महीनों में एफडीआई और एफपीआई में गिरावट आई है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा है।
सरकार से मांग
कांग्रेस सांसद ने सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट रूप से बताए—
- पश्चिम एशिया संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा
- आगे की रणनीति क्या होगी
उन्होंने चेतावनी दी कि 1 मई के बाद देश एक नई आर्थिक स्थिति में प्रवेश कर सकता है, जिसके लिए पारदर्शिता और ठोस नीति जरूरी है।





