इनोविजन की कमजोर लिस्टिंग, पहले ही दिन IPO निवेशकों को 25% तक का नुकसान

सोमवार को शेयर बाजार में टोल मैनेजमेंट और मैनपावर सर्विस देने वाली कंपनी Innovision Limited की कमजोर लिस्टिंग ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। कंपनी के शेयर IPO प्राइस 519 रुपये के मुकाबले BSE पर 466 रुपये और NSE पर 467.70 रुपये पर लिस्ट हुए, जिससे शुरुआत में ही करीब 10% का नुकसान हो गया।

लिस्टिंग के बाद शेयर पर बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। सुबह 11 बजे तक के कारोबार में यह गिरकर 384.80 रुपये तक पहुंच गया। इस स्तर पर IPO निवेशकों को प्रति शेयर 134.20 रुपये यानी करीब 25.86% का नुकसान हो चुका था।

कंपनी का IPO 10 मार्च को खुला था, जिसे कमजोर सब्सक्रिप्शन के कारण 12 मार्च से बढ़ाकर 17 मार्च तक करना पड़ा। साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्राइस बैंड को 521–548 रुपये से घटाकर 494–519 रुपये कर दिया गया था। इसके बावजूद यह इश्यू कुल 3.46 गुना ही सब्सक्राइब हो सका।

सब्सक्रिप्शन आंकड़ों में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा 14.30 गुना (एंकर छोड़कर) सब्सक्राइब हुआ, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) का हिस्सा 8.60 गुना भरा। वहीं रिटेल निवेशकों की रुचि बेहद कमजोर रही और उनका कोटा केवल 0.60 गुना ही भर सका।

IPO के तहत कंपनी ने 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 58.91 लाख शेयर जारी किए। इसमें 255 करोड़ रुपये के नए शेयर और 68 करोड़ रुपये के ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल थे। कंपनी इस फंड का उपयोग कर्ज कम करने, वर्किंग कैपिटल और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए करने की योजना बना रही है।

हालांकि, कंपनी के वित्तीय आंकड़े बेहतर रहे हैं। वित्त वर्ष 2022-23 में 8.88 करोड़ रुपये का मुनाफा 2024-25 में बढ़कर 29.02 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी तरह राजस्व भी 257.62 करोड़ से बढ़कर 895.95 करोड़ रुपये हो गया।

इसके बावजूद कंपनी पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता गया है, जो 2022-23 में 33.34 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 की पहली छमाही में 112.39 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यही बढ़ता कर्ज और कमजोर रिटेल डिमांड लिस्टिंग पर दबाव का मुख्य कारण रहा।

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