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पीएम-किसान की 22वीं किस्त जारी करेंगे पीएम मोदी, 9.32 करोड़ किसानों को मिलेंगे ₹18,640 करोड़

Narendra Modi शुक्रवार को Guwahati में आयोजित एक कार्यक्रम में Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi की 22वीं किस्त जारी करेंगे। इस किस्त के तहत देशभर के लगभग 9.32 करोड़ किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से करीब 18,640 करोड़ रुपये की राशि भेजी जाएगी।

इस संबंध में जानकारी देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने बताया कि पीएम-किसान योजना के तहत अब तक किसानों को 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। इस योजना से देश की 2.15 करोड़ से अधिक महिला किसान भी लाभान्वित हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि विभिन्न अध्ययनों से यह सामने आया है कि इस प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता से किसानों के कृषि निवेश में वृद्धि हुई है और साहूकारों पर उनकी निर्भरता कम हुई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है और किसानों की आय में स्थिरता आई है।

केंद्रीय मंत्री ने पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब खाद्यान्न उत्पादन में वैश्विक शक्ति बनकर उभरा है। करीब 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ भारत ने इस क्षेत्र में China को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में पहला स्थान प्राप्त किया है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 252 मिलियन टन था, जो अब बढ़कर 357 मिलियन टन हो गया है। वहीं फल और सब्जियों के उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह 277 मिलियन टन से बढ़कर 369 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत दाल उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सरकार तुअर (अरहर), मसूर और उड़द जैसी दालों की रिकॉर्ड खरीद कर रही है। किसानों को तकनीकी सहायता देने के लिए ‘भारत विस्तार’ नामक एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत भी की गई है, जिससे किसान एक फोन कॉल के जरिए अपनी स्थानीय भाषा में खेती से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में जहां कृषि ऋण 8.45 लाख करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 28.69 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वहीं फसल बीमा योजना के तहत किसानों को लगभग दो लाख करोड़ रुपये के दावों का भुगतान भी किया जा चुका है। कृषि बजट में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह अब बढ़कर प्रतिवर्ष 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

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