मुरैना में शराब दुकानों की नीलामी अटकी, 4 ग्रुप की 17 दुकानों से ही मिलेगा 57 करोड़ राजस्व

मध्य प्रदेश के Morena जिले में आबकारी विभाग द्वारा शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया इस बार संकट में नजर आ रही है। जिले में कुल 23 ग्रुप की करीब 59 दुकानों की नीलामी प्रस्तावित है, लेकिन अब तक केवल 4 ग्रुप की 17 दुकानों की ही नीलामी हो पाई है। इन दुकानों से सरकार को लगभग 57 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, इस वर्ष लाइसेंस शुल्क में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी, जिसके चलते शासन को 355 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व मिलने का अनुमान था। हालांकि चालू वित्तीय वर्ष में शराब की बिक्री कम रहने से मौजूदा लाइसेंसधारी कंपनी को लगभग 80 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की बात सामने आई है। इसी वजह से कई ठेकेदार नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने से हिचकिचा रहे हैं।

पिछले वर्ष पूरे जिले की शराब दुकानों की नीलामी लगभग 296 करोड़ रुपये में हुई थी। इस बार चार प्रयासों के बावजूद सिर्फ 4 ग्रुप की 17 दुकानों का ही निष्पादन हो सका है। जिला प्रशासन अब शेष 19 ग्रुप की 42 दुकानों की नीलामी प्रक्रिया को तेज करने में जुटा हुआ है। इन दुकानों में जिले के कई प्रमुख शहरों और कस्बों की बड़ी और छोटी दुकानें शामिल हैं।

आबकारी विभाग के अनुसार नई लाइसेंस व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू होनी है, इसलिए 31 मार्च से पहले सभी दुकानों की नीलामी पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में Ambah, Porsa, Joura, Kailaras और Sabalgarh सहित कई प्रमुख क्षेत्रों की दुकानों की नीलामी होना बाकी है।

वहीं स्थानीय स्तर पर शराब कारोबार को लेकर प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल रही है। जिले के खास-खेड़ा क्षेत्र के दो चचेरे भाइयों के बीच शराब दुकानों को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा बताई जा रही है। दोनों ने अलग-अलग ग्रुपों की दुकानों पर दावा जताया है, जिससे नीलामी प्रक्रिया में सीमित स्तर पर प्रतिस्पर्धा बन पाई है और सरकार को कुछ राजस्व प्राप्त हुआ है।

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