अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: छह खेलों में भारतीय महिला खिलाड़ियों का दम, वैश्विक मंच पर बदल रही खेल की तस्वीर

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भारतीय खेल जगत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सफलता नई प्रेरणा दे रही है। इस वर्ष की थीम #GiveToGain इस बात को रेखांकित करती है कि जब महिला खिलाड़ियों को सही अवसर, संसाधन और समर्थन मिलता है, तो वे न केवल रिकॉर्ड बनाती हैं बल्कि पूरे खेल परिदृश्य को बदलने की क्षमता भी दिखाती हैं।

आज भारतीय महिला खिलाड़ी क्रिकेट, हॉकी, स्क्वैश, रनिंग, मोटरस्पोर्ट और जूडो जैसे कई खेलों में शानदार प्रदर्शन कर वैश्विक मंच पर देश का नाम रोशन कर रही हैं। आइए जानते हैं उन छह खेलों के बारे में जहां भारतीय महिलाएं नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं।

क्रिकेट: विश्व कप जीत के साथ नया स्वर्णिम दौर

भारत में महिला क्रिकेट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। मजबूत लीग संरचना और अंतरराष्ट्रीय सफलताओं ने इस खेल को नई पहचान दी है। इस सफलता के केंद्र में Harmanpreet Kaur हैं, जिन्होंने भारत को पहला आईसीसी महिला विश्व कप खिताब दिलाकर इतिहास रचा।

स्टार बल्लेबाज Smriti Mandhana ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने भारत के विश्व कप अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया और बाद में Royal Challengers Bengaluru को दूसरा महिला प्रीमियर लीग खिताब दिलाया।

इसके अलावा Jemimah Rodrigues ने सेमीफाइनल में निर्णायक भूमिका निभाई, जबकि Shafali Verma ने चोटिल खिलाड़ी की जगह लेते हुए शानदार प्रदर्शन कर ‘प्लेयर ऑफ द फाइनल’ का खिताब जीता।

हॉकी: अनुभव और नेतृत्व की मजबूत ताकत

भारतीय महिला हॉकी टीम निरंतर प्रदर्शन और मजबूत नेतृत्व के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। फॉरवर्ड Navneet Kaur भारतीय आक्रमण की अहम कड़ी हैं और 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी हैं।

वहीं कप्तान और गोलकीपर Savita Punia टीम की रक्षा पंक्ति की मजबूत दीवार हैं। 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी सविता ने एशियाई खेलों में भारत को कई पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई और उन्हें हाल ही में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

स्क्वैश: युवा प्रतिभा की वैश्विक उड़ान

महज 17 वर्ष की उम्र में Anahat Singh विश्व स्क्वैश की उभरती हुई बड़ी प्रतिभाओं में शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने पीएसए वर्ल्ड रैंकिंग के टॉप-20 में जगह बनाकर करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग 18 हासिल की।

अमेरिका में स्क्वैश ऑन फायर ओपन जीतकर उन्होंने अपना पहला पीएसए ब्रॉन्ज-लेवल खिताब भी जीता और भारत की नई उम्मीद बनकर उभरी हैं।

रनिंग: सहनशक्ति और प्रेरणा की मिसाल

एंड्योरेंस स्पोर्ट्स में भी भारतीय महिलाएं प्रेरणादायक कहानियां लिख रही हैं। कमर्शियल एयरलाइन पायलट Asmita Handa देशभर के धावकों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने कई मैराथन पूरी करने के साथ 2025 में माउंट किलिमंजारो पर भी सफलतापूर्वक चढ़ाई की।

इसी तरह Roshni Guhathakurta की कहानी भी बेहद प्रेरक है। जन्म से ‘क्लबफुट’ की समस्या के बावजूद उन्होंने दौड़ के जरिए अपने जीवन को नई दिशा दी और तीन बार टाटा मुंबई मैराथन पूरी की।

मोटरस्पोर्ट: ट्रैक पर बढ़ती महिला भागीदारी

भारत में मोटरस्पोर्ट में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। इस बदलाव की प्रतीक Fabienne Wohlwend बनीं, जिन्होंने गोवा स्ट्रीट रेस जीतकर इतिहास रचा।

मुंबई की युवा रेसर Raashi Shah को स्वीडन में होने वाली रेसिंग वीमेन ग्लोबल कॉम्पिटिशन 2025-26 के लिए चुना गया है। वहीं Avani Veeramaneni भारत की सबसे कम उम्र की फॉर्मूला-4 रेसर बन चुकी हैं।

इसके अलावा श्रीनगर की 12 वर्षीय Atika Mir ने ‘चैंपियंस ऑफ द फ्यूचर एकेडमी’ जीतकर अंतरराष्ट्रीय कार्टिंग खिताब हासिल करने वाली पहली भारतीय बनने का गौरव प्राप्त किया।

जूडो: मणिपुर से उभरती नई उम्मीद

जूडो में भारत का भविष्य मणिपुर की दो युवा खिलाड़ियों—Linthaoi Chanambam और Taibangnabi Chanu—के रूप में देखा जा रहा है।

लिन्थोई ने विश्व कैडेट जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा और ऐसा करने वाली पहली भारतीय बनीं। वहीं ताइबंगनबी चानू ने विश्व जूनियर जूडो चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाई।

इन दोनों खिलाड़ियों को वर्तमान में Inspire Institute of Sport में प्रशिक्षण दिया जा रहा है और आने वाले वर्षों में उनसे भारत के लिए बड़े पदक जीतने की उम्मीद की जा रही है।

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