नेपाल में चुनावी हलचल तेज, प्रतिनिधि सभा चुनाव से पहले सेना ने संभाला मोर्चा

नेपाल में आगामी प्रतिनिधि सभा चुनाव को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। 5 मार्च को होने वाले चुनावों के मद्देनजर आज से नेपाली सेना ने भी औपचारिक रूप से सुरक्षा मोर्चा संभाल लिया है। निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चारों सुरक्षा निकायों को एकीकृत सुरक्षा योजना के तहत तैनात किया जा रहा है।
इस सुरक्षा व्यवस्था में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस, सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल और राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग को संयुक्त रूप से परिचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही चुनावी प्रयोजन के लिए भर्ती की गई ‘निर्वाचन पुलिस’ को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया है।
योजना के अनुसार, मतदान स्थलों की भीतरी सुरक्षा की जिम्मेदारी नेपाल पुलिस और निर्वाचन पुलिस को सौंपी गई है। दूसरे स्तर की घेराबंदी सशस्त्र प्रहरी बल संभालेगा, जबकि बाहरी सुरक्षा घेरा नेपाली सेना के जिम्मे रहेगा। नेपाली सेना आज से सभी 165 निर्वाचन क्षेत्रों में तैनात हो चुकी है।
राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने प्रधानमंत्री की सिफारिश और मंत्रिपरिषद के निर्णय पर पिछले वर्ष 27 नवंबर को चुनाव सुरक्षा के लिए सेना की तैनाती को स्वीकृति दी थी। सेना के प्रवक्ता एवं सहायक रथी राजाराम बस्नेत के अनुसार, चुनाव सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देशभर में आवश्यकता अनुसार सेना के बेस स्थापित किए जाएंगे और संयुक्त गश्त भी की जाएगी।
चुनाव ड्यूटी में करीब 80 हजार सैनिक तैनात रहेंगे। इसके साथ ही हवाई अड्डों, कारागारों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं की सुरक्षा भी नेपाली सेना के जिम्मे होगी। मतपत्रों की छपाई, उनका परिवहन, मतदान स्थलों और मतगणना केंद्रों की सुरक्षा भी सेना द्वारा की जाएगी।
इस चुनाव में कुल 3,406 उम्मीदवार मैदान में हैं और 18 जनवरी से चुनाव आचार संहिता लागू है। देशभर में 10,967 मतदान स्थल और 23,112 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से 2,845 मतदान स्थल सामान्य, 4,442 संवेदनशील और 3,680 अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में रखे गए हैं।
नेपाल पुलिस की ओर से करीब 77 हजार जवानों की तैनाती की जाएगी। मौजूदा बल को अपर्याप्त मानते हुए 1.33 लाख निर्वाचन पुलिस की भर्ती की गई है। वहीं सशस्त्र प्रहरी बल की ओर से 49,686 कर्मियों की तैनाती होगी, जिसमें 34,576 नियमित बल और 15,110 निर्वाचन पुलिस शामिल हैं। बल ने किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में 10 मिनट के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करने की व्यवस्था की है।
चुनाव से पहले सुरक्षा व्यवस्था के इस व्यापक इंतजाम को नेपाल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।






