| |

उत्तर प्रदेश में निवेश का नया युग: 15 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाएं, रोजगार में बढ़ोतरी

उत्तर प्रदेश ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते पौने नौ वर्षों में निवेश और औद्योगिकीकरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति की है। वर्ष 2018 की पहली इन्वेस्टर्स समिट से लेकर 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक प्रदेश ने निवेश को सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्राउंड ब्रेकिंग और क्रियान्वयन के मॉडल के माध्यम से इसे धरातल पर उतारा।

प्रदेश में अब तक 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 16,000 से अधिक परियोजनाओं का शिलान्यास किया जा चुका है। इनमें से 8,300 से अधिक परियोजनाएं व्यावसायिक रूप से संचालित हो रही हैं, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार मिला है।

प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर नीति, आईटी-आईटीईएस, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किए गए सुनियोजित प्रयासों ने यूपी को बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकालकर राष्ट्रीय औद्योगिक केंद्र बना दिया।

योगी सरकार ने निवेश को केवल एमओयू तक सीमित नहीं रखा। चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों के माध्यम से 16,000 से अधिक परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया, जिससे प्रदेश में इन्फ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिकीकरण में तेज़ी आई।

प्रदेश में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, मेगा लेदर क्लस्टर, फूड पार्क और फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल जैसे उपायों से छोटे और मध्यम निवेशकों को भी मुख्यधारा से जोड़ा गया। आज देश के 65% से अधिक मोबाइल फोन उत्तर प्रदेश में बने और लखनऊ-नोएडा जैसे शहर उभरते टेक हब बन चुके हैं।

गति शक्ति के जरिए औद्योगिक क्लस्टर, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब और ट्रांस-गंगा सिटी ने राज्य की इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन इकॉनमी को बढ़ावा दिया। डिफेंस कॉरिडोर, ब्रह्मोस इंटीग्रेशन सुविधा और अदानी डिफेंस जैसी मेगा यूनिट्स ने उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय सुरक्षा उत्पादन केंद्र बनाया।

बुंदेलखंड, पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों की स्थापना यह दर्शाती है कि योगी सरकार का विकास मॉडल समान और समावेशी है। निवेश, रोजगार, डिजिटल इकॉनमी और औद्योगिक प्रगति के साथ उत्तर प्रदेश आज भारत के सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है।

Share

Similar Posts