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इंदौर में बीआरटीएस हटाने पर फिर ब्रेक! ठेकेदार ने किया सरेंडर, नगर निगम नई एजेंसी की तलाश में

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में बीआरटीएस (बॉस्ड रैपिड ट्रांसिट सिस्टम) हटाने का काम फिर से रुक गया है, क्योंकि वर्तमान ठेकेदार ने परियोजना से ‘सरेंडर’ कर दिया है। इस वजह से नगर निगम को इस बड़े शहरी यातायात परियोजना के लिए नई एजेंसी चुनने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी है।

बता दें कि इंदौर नगर निगम द्वारा शहर की चारों तरफ फैले बड़े बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाकर सड़क सुधार एवं पुनर्रचना का काम चल रहा था, लेकिन ठेकेदार की अचानक सरेंडर की वजह से यह परियोजना फिलहाल ठप्प हो गई है।

नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि ठेकेदार ने परियोजना से अलग होने का फैसला कई तकनीकी और वित्तीय कारणों से लिया है। जिसके चलते निगम अब इस कार्य को पूरा करने के लिए नई, अनुभवी एजेंसी की तलाश में लगा हुआ है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नगर निगम जल्द बोली आमंत्रित करेगा, ताकि नए ठेकेदार के साथ फिर से इस महत्वपूर्ण कार्य को शुरू किया जा सके। हालांकि, इस प्रक्रिया में कुछ समय लगेगा और शहर में बीआरटीएस हटाने का कार्य निर्धारित समय पर पूरा नहीं हो पाएगा।

बीआरटीएस हटाने का यह कार्य शहर में ट्रैफिक की सुगमता, वाहनों के लिए सुरक्षित लेन, और सड़क संरचना में सुधार करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। लेकिन ठेकेदार के सरेंडर के कारण नगर निगम को नई एजेंसी की तलाश के साथ कार्य प्रगति में देरी का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, नए अनुबंध के लिए मानक और पात्रता मानदंड तय कर दिए गए हैं और जल्द ही चयन प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। इसके साथ ही निगम की कोशिश रहेगी कि बीआरटीएस हटाने का काम जल्द से जल्द शुरू हो सके और इंदौर के नागरिकों को यातायात सुधार का लाभ मिल सके।

नगर निगम इस बात पर भी ध्यान दे रहा है कि कार्य में देरी के कारण पर्यावरण, यातायात और स्थानीय व्यापारियों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम से कम किया जाए। आगामी सप्ताह में निगम द्वारा एक बैठक भी आयोजित की जाएगी, जिसमें नए एजेंसी चयन के मानदंड और समयसीमा तय की जाएगी।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बीआरटीएस हटाने के साथ साथ सिटी रोड नेटवर्क के सुधार के लिए कई तकनीकी मापदंड तैयार किए जा रहे हैं, जिनके आधार पर नई एजेंसी को अनुबंध प्रदान किया जाएगा

इससे पहले भी बीआरटीएस हटाने के कार्य में कई बार तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण देरी हो चुकी है, लेकिन इस बार ठेकेदार के सरेंडर के बाद यह परियोजना एक बार फिर बाधा की राह पर है।

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