भारत और लक्ज़मबर्ग ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष सहयोग को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई

नई दिल्ली, 06 नवंबर 2025 — भारत और लक्ज़मबर्ग ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। नई दिल्ली में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और लक्ज़मबर्ग ग्रैंड डची के राजदूत क्रिश्चियन बीवर ने यूरोपीय बाजारों में भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने साइबर सुरक्षा, क्वांटम प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे उभरते नवाचार क्षेत्रों में संयुक्त पहल शुरू करने की दिशा में सहमति जताई। मंत्रालय के अनुसार, इस सहयोग से न केवल भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय स्टार्टअप्स को नए अवसर भी प्राप्त होंगे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस अवसर पर कहा कि भारत आज विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में एक वैश्विक अग्रणी के रूप में उभरा है। देश अब वैज्ञानिक प्रकाशनों और स्टार्टअप गतिविधियों में विश्व के शीर्ष तीन देशों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन की सफलता ने भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान और निर्माण के क्षेत्र में एक मज़बूत केंद्र के रूप में स्थापित किया है।
डॉ. सिंह ने बताया कि भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच साझेदारी पहले से ही मजबूत रही है — लक्ज़मबर्ग के दो उपग्रहों को भारत के पीएसएलवी रॉकेट से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया था। उन्होंने कहा कि यह सहयोग आने वाले वर्षों में नई तकनीकी सीमाओं को पार करेगा और दोनों देशों के वैज्ञानिक संबंधों को नई ऊँचाई देगा।






