‘स्मार्ट’ गैजेट्स से ऊब रही नई पीढ़ी! अब ‘बेसिक’ चीजों में तलाश रहे सुकून

‘स्मार्ट’ से ऊबे लोग, ‘बेसिक’ चीजों में सुकून की तलाश

कुछ साल पहले तक टेक्नोलॉजी की दुनिया में ‘स्मार्ट’ शब्द किसी जादू से कम नहीं था। स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, स्मार्ट वॉच और स्मार्ट होम जैसे डिवाइसेज लोगों को भविष्य की दुनिया का अनुभव देने का दावा करते थे। सपना यह था कि फ्रिज खुद दूध ऑर्डर करेगा, दरवाजा मोबाइल से खुलेगा और हर डिवाइस इंटरनेट से जुड़ा होगा।

लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। खासकर टेक सेवी युवा और जेन-जी ऐसी टेक्नोलॉजी की ओर लौट रहे हैं, जो सिर्फ जरूरी काम करे और हर समय इंटरनेट या ऐप्स से जुड़ी न रहे।

बेसिक फोन की ओर लौट रहे युवा

अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों में युवा अब बेसिक फोन अपनाने लगे हैं। इनमें सिर्फ कॉल, मैसेज और कुछ जरूरी फीचर्स होते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 2021 से 2024 के बीच जेन-जी में बेसिक फोन की बिक्री 148% तक बढ़ी। वहीं करीब 16% जेन-जी युवाओं के पास ऐसे फोन हैं, जबकि 28% इन्हें खरीदने के इच्छुक हैं

डिजिटल थकान बनी बड़ी वजह

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह डिजिटल थकान (Digital Fatigue) को माना जा रहा है। लगातार नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन रहने का दबाव और डेटा ट्रैकिंग लोगों को मानसिक रूप से थका रही है।

आज की युवा पीढ़ी ऐसी डिवाइसेज चाहती है जो:

  • हर समय डेटा ट्रैक न करें
  • जरूरत से ज्यादा नोटिफिकेशन न भेजें
  • सिर्फ जरूरी काम करें
  • स्क्रीन टाइम पर बेहतर कंट्रोल दें

यानी स्मार्टनेस का मतलब अब हर चीज को इंटरनेट से जोड़ना नहीं, बल्कि यह तय करना है कि क्या कनेक्ट करना जरूरी है और क्या नहीं।

भारत में भी दिख रहे बदलाव के संकेत

भारत में स्मार्ट गैजेट्स की मांग अभी मजबूत है, लेकिन कुछ संकेत बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार 2024 में भारत का वियरेबल मार्केट 11.3% घटकर 11.9 करोड़ यूनिट रह गया, जबकि स्मार्टवॉच शिपमेंट में 34.4% की गिरावट दर्ज की गई।

अब लोग ऐसे ‘बेसिक टीवी’ और स्क्रीन पसंद करने लगे हैं जो सिर्फ वही दिखाएं जो यूजर देखना चाहता है, न कि उसकी आदतों को लगातार ट्रैक करें।

प्राइवेसी भी बनी चिंता

स्मार्ट डिवाइसेज को लेकर डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी की चिंता भी तेजी से बढ़ रही है। सर्वे के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग इस बात से परेशान हैं कि स्मार्ट डिवाइसेज उनकी निजी जानकारी और व्यवहार को ट्रैक करते हैं।

भारत में स्मार्ट होम का बाजार फिर भी बढ़ रहा

हालांकि, भारत में स्मार्ट होम मार्केट अभी भी तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र माना जा रहा है। अनुमान है कि यह बाजार 2024 के करीब 31 हजार करोड़ रुपए से बढ़कर 2030 तक 1.57 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।

नई पीढ़ी टेक्नोलॉजी से दूरी नहीं बना रही, बल्कि उसे अपनी शर्तों पर इस्तेमाल करना चाहती है। उनके लिए बेसिक चीजें अब पिछड़ेपन की नहीं, बल्कि सुकून, प्राइवेसी और समय पर नियंत्रण की पहचान बनती जा रही हैं। शायद आने वाले समय की सबसे बड़ी टेक क्रांति वही हो — कम शोर करने वाली, लेकिन ज्यादा समझदार टेक्नोलॉजी।

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