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गुजरात बना बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम का अग्रणी राज्य, 870 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं शुरू

Gujarat अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) यानी बिजली संग्रहण प्रणाली के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

देश के पहले सोलर विलेज Modhera के सफल मॉडल के बाद राज्य में अब 870 मेगावाट क्षमता वाली पांच बड़ी बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं शुरू की गई हैं।

5 स्थानों पर शुरू हुई परियोजनाएं

राज्य सूचना विभाग के अनुसार अहमदाबाद जिले के साणंद तालुका के चराल गांव में नई बैटरी स्टोरेज प्रणाली शुरू की गई है।

इसके अलावा मोढेरा और कच्छ के लखपत समेत अन्य स्थानों पर भी यह तकनीक कार्यरत है।

अहमदाबाद, गांधीनगर, बनासकांठा, पाटन और कच्छ जिलों में 13 नए प्रोजेक्ट्स का पंजीकरण भी किया गया है।

क्या है Battery Energy Storage System?

बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम बिजली को संग्रहित करने वाली आधुनिक तकनीक है।

सौर ऊर्जा जैसे रिन्यूएबल स्रोतों से दिन में अधिक बिजली बनती है, जबकि शाम को उत्पादन कम हो जाता है। ऐसे में अतिरिक्त बिजली को बैटरी में स्टोर कर पीक डिमांड के समय उपयोग किया जा सकता है।

इससे बिजली ग्रिड पर दबाव कम होता है और सप्लाई अधिक स्थिर बनी रहती है।

सरकार की नई ऊर्जा रणनीति

Bhupendra Patel के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी के साथ बैटरी स्टोरेज सिस्टम को तेजी से बढ़ावा दिया है।

राज्य की Gujarat Integrated Renewable Energy Policy-2025 में आधुनिक ऊर्जा संग्रहण प्रणालियों को विशेष महत्व दिया गया है।

इसके तहत स्वतंत्र बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़े स्टोरेज सिस्टम को मंजूरी दी जा रही है।

ग्रिड स्थिरता और इमरजेंसी बैकअप में मदद

राज्य सरकार के मुताबिक यह तकनीक केवल बिजली संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रिड को वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी सपोर्ट देने, ट्रांसमिशन लॉस कम करने और इमरजेंसी बैकअप उपलब्ध कराने में भी मदद करेगी।

जेटको और बिजली वितरण कंपनियां ग्रिड क्षमता के आधार पर इन परियोजनाओं के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन कर रही हैं।

2030 के ऊर्जा लक्ष्य में अहम भूमिका

गुजरात सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के जरिए राज्य वर्ष 2030 तक भारत के 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

यह लक्ष्य Narendra Modi द्वारा स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य के विजन के तहत तय किया गया है।

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